पुणे रेप-मर्डर केस में दोषी भीमराव कांबले को फांसी की सजा | Source: Social media

पुणे रेप-मर्डर केस में दोषी भीमराव कांबले को फांसी की सजा Source : Social media

महाराष्ट्र के पुणे जिले में चार साल की मासूम बच्ची के साथ हुई दरिंदगी और हत्या के मामले में अदालत ने बड़ा और सख्त फैसला सुनाया है। इस दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। मासूम के साथ जिस बेरहमी से अपराध किया गया, उसे लेकर लोगों में भारी आक्रोश था और दोषी के लिए कड़ी से कड़ी सजा की मांग की जा रही थी। पुलिस ने भी मामले की जांच तेज़ी से पूरी करते हुए सभी अहम सबूत जुटाए और रिकॉर्ड समय में अदालत के सामने मजबूत केस पेश किया।अब इस मामले में पुणे की विशेष POCSO अदालत ने घटना के महज 59 दिनों के भीतर फैसला सुनाते हुए 65 वर्षीय आरोपी भीमराव प्रभाकर कांबले को फांसी की सजा सुनाई है। अदालत ने कहा कि आरोपी ने एक मासूम बच्ची के साथ बेहद क्रूर और अमानवीय अपराध किया है। इसलिए यह मामला रेयरेस्ट ऑफ द रेयर की श्रेणी में आता है और आरोपी किसी भी तरह की नरमी का हकदार नहीं है। इस फैसले को त्वरित न्याय का बड़ा उदाहरण माना जा रहा है।

सभी आरोप साबित, कोर्ट ने सुनाई फांसी

पुणे की विशेष POCSO अदालत ने भीमराव प्रभाकर कांबले को अपहरण, दुष्कर्म और हत्या समेत सभी मामलों में दोषी मानते हुए फांसी की सजा सुनाई। अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ लगाए गए सभी सात आरोप साबित करने में सफल रहा है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने 137 पन्नों का विस्तृत फैसला तैयार किया। इससे पहले 26 जून को आरोपी को दोषी ठहराया गया था और अब उसे मौत की सजा सुनाई गई है।

बछड़ा दिखाने का झांसा देकर बच्ची को ले गया था आरोपी

पुलिस जांच के मुताबिक, यह घटना 1 मई को पुणे जिले के नसरापुर गांव में हुई थी। आरोपी भीमराव कांबले चार साल की बच्ची को खाने-पीने की चीजें देने और बछड़ा दिखाने का लालच देकर अपने साथ मवेशियों के शेड तक ले गया। वहां उसने बच्ची के साथ दुष्कर्म किया और बाद में उसका मुंह दबाकर तथा गंभीर चोटें पहुंचाकर उसकी हत्या कर दी। जांच में सामने आए सबूतों और गवाहों के बयानों के आधार पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मजबूत केस तैयार किया, जिसे अदालत ने भी सही माना।

जांच और सुनवाई को मिली त्वरित न्याय की मिसाल

इस मामले में पुलिस ने तेजी से जांच पूरी करते हुए सबूत, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, सीसीटीवी फुटेज और गवाहों के बयानों के आधार पर अदालत में मजबूत केस पेश किया। इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी मानते हुए फांसी की सजा सुनाई। इस फैसले के बाद पीड़ित परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद जगी है। वहीं, इस निर्णय को महिलाओं और बच्चों के खिलाफ होने वाले जघन्य अपराधों पर सख्त संदेश देने वाला फैसला माना जा रहा है।