वडोदरा। पूर्व भारतीय क्रिकेटर और लोकसभा सांसद यूसुफ पठान को गुजरात के वडोदरा में करोड़ों रुपये कीमत वाला एक प्लॉट आवंटित करने का मामला एक बार फिर चर्चा में है। रिपोर्ट के अनुसार, गुजरात सरकार के आदेश के आधार पर वडोदरा नगर निगम (VMC) ने जमीन आवंटन का प्रस्ताव तैयार किया है। इस प्रस्ताव के तहत कुल 978 वर्गमीटर जमीन में से 500 वर्गमीटर यूसुफ पठान को मुफ्त देने और शेष 478 वर्गमीटर जमीन 55 प्रतिशत रियायती दर पर आवंटित करने की व्यवस्था की गई है। हालांकि, प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय नगर निगम की स्थायी समिति को लेना है। इस मामले की खास बात यह है कि जिस जमीन को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है, उसी प्लॉट के संबंध में यूसुफ पठान को पहले अतिक्रमण हटाने का नोटिस भी दिया गया था। अब राज्य सरकार की ओर से जमीन आवंटन के लिए आदेश जारी होने के बाद यह मामला फिर सुर्खियों में आ गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, प्लॉट की अनुमानित कीमत करीब 20.5 करोड़ रुपये आंकी गई थी।
20.5 करोड़ रुपये तक आंकी गई प्लॉट की कीमत, जमीन आवंटन का प्रस्ताव तैयार
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, विवादित प्लॉट वडोदरा के तंदलजा इलाके में टाउन प्लानिंग स्कीम 22 के फाइनल प्लॉट नंबर 90 के अंतर्गत स्थित है। इस जमीन के पास ही यूसुफ पठान के परिवार का घर बताया गया है। प्लॉट का कुल क्षेत्रफल 978 वर्गमीटर है। सरकार के आदेश के अनुसार, इसमें से 500 वर्गमीटर जमीन मुफ्त देने और बाकी 478 वर्गमीटर को 55 प्रतिशत रियायती दर पर उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि जुलाई में वडोदरा नगर निगम की स्थायी समिति ने इस प्लॉट की नीलामी की तैयारी की थी। उस समय जमीन की दर 2.10 लाख रुपये प्रति वर्गमीटर आंकी गई थी। इसी दर के आधार पर पूरे प्लॉट का अनुमानित मूल्य करीब 20.5 करोड़ रुपये बैठता है। हालांकि, जमीन पर कथित अतिक्रमण से जुड़ा विवाद सामने आने के बाद नीलामी की प्रक्रिया रोक दी गई थी। उस समय कहा गया था कि विवाद का समाधान होने तक प्लॉट के मामले को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता। राज्य सरकार के आदेश में यह भी कहा गया है कि इस फैसले को भविष्य के अन्य मामलों के लिए उदाहरण या नजीर के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। इसके अलावा, गुजरात सरकार का राजस्व विभाग नगर निगम को इस जमीन के बराबर मूल्य की जमीन उपलब्ध कराएगा। फिलहाल, आवंटन संबंधी प्रस्ताव को नगर निगम की स्थायी समिति के सामने रखा जाना है।
2012 में शुरू हुआ था जमीन का विवाद, 99 साल की लीज मांगी थी
यूसुफ पठान से जुड़े इस जमीन विवाद की शुरुआत वर्ष 2012 में हुई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, उस समय पठान ने वडोदरा नगर निगम से संपर्क कर बिना नीलामी के इस प्लॉट को 99 साल की लीज पर देने का अनुरोध किया था। अपने आवेदन में उन्होंने क्रिकेटर होने और सुरक्षा संबंधी चिंताओं का हवाला दिया था। बताया गया है कि उस समय नगर निगम ने उनके अनुरोध को स्वीकार कर लिया था। उस वक्त जमीन की कीमत करीब 5.6 करोड़ रुपये बताई गई थी और यूसुफ पठान इसे चुकाने के लिए तैयार थे। हालांकि, बिना नीलामी के जमीन आवंटित करने के लिए गुजरात सरकार की मंजूरी आवश्यक थी। वर्ष 2014 में राज्य के शहरी विकास विभाग ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया। इसके बाद नगर निगम ने आरोप लगाया कि सरकारी मंजूरी नहीं मिलने के बावजूद यूसुफ पठान ने प्लॉट के चारों ओर घेराबंदी कर दी थी। इसी घटनाक्रम ने जमीन को लेकर विवाद को और गंभीर बना दिया। हालांकि, जमीन पर कब्जे और आवंटन से जुड़े विभिन्न पहलुओं को संबंधित सरकारी रिकॉर्ड और न्यायिक आदेशों के संदर्भ में देखा जाना जरूरी है।
2024 में अतिक्रमण हटाने का नोटिस, गुजरात हाई कोर्ट तक पहुंचा मामला
वर्ष 2024 में वडोदरा नगर निगम ने यूसुफ पठान को कथित अतिक्रमण हटाने के लिए नोटिस जारी किया था। इसके बाद लोकसभा सांसद ने गुजरात हाई कोर्ट का रुख किया और इस कार्रवाई के खिलाफ याचिका दायर की। जमीन के आवंटन और उस पर अधिकार से जुड़े सवालों के कारण मामला अदालत तक पहुंच गया। रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त 2025 में गुजरात हाई कोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से जमीन आवंटन का प्रस्ताव खारिज किए जाने के फैसले को बरकरार रखा था। इसके बाद भी जमीन को लेकर विवाद पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ। इस वर्ष जून में हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने यह सवाल उठाया था कि बिना भुगतान या आवंटन की आवश्यक औपचारिकताएं पूरी किए किसी जमीन पर अधिकार कैसे हासिल किया जा सकता है। इस घटनाक्रम से स्पष्ट है कि जमीन का मामला केवल नगर निगम की संपत्ति के आवंटन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें सरकारी मंजूरी, कथित अतिक्रमण और कानूनी प्रक्रिया जैसे मुद्दे भी शामिल रहे हैं। अब राज्य सरकार के नए आदेश के बाद नगर निगम के स्तर पर प्रस्ताव आगे बढ़ाया जा रहा है।
31 अगस्त को यूसुफ पठान ने वापस ली याचिका
रिपोर्ट के मुताबिक, 31 अगस्त को यूसुफ पठान ने अपने वकील से गुजरात हाई कोर्ट में दायर अपील वापस लेने के लिए कहा था। उनके वकील ने अदालत को बताया कि इस मामले का समाधान न्यायालय के बाहर भी निकाला जा सकता है। इसके बाद अपील वापस लेने की प्रक्रिया सामने आई। इस घटनाक्रम में राज्य सरकार की ओर से जारी आदेश की तारीख भी महत्वपूर्ण है। रिपोर्ट के अनुसार, गुजरात सरकार ने 13 अगस्त को आदेश जारी किया था, जो 29 अगस्त को वडोदरा नगर निगम के पास पहुंचा। इसके दो दिन बाद, 31 अगस्त को यूसुफ पठान की ओर से अपील वापस लेने का कदम उठाया गया। हालांकि, अपील वापस लेने और जमीन आवंटन के प्रस्ताव के बीच संबंधों को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक दस्तावेजों और संबंधित पक्षों के बयानों को ध्यान में रखना आवश्यक है। फिलहाल, उपलब्ध जानकारी के अनुसार नगर निगम में आवंटन प्रस्ताव पर आगे की प्रक्रिया जारी है।
नगर निगम आयुक्त ने क्या कहा?
अखबार से बातचीत में वडोदरा नगर निगम के आयुक्त अरुण महेश बाबू ने कहा कि गुजरात सरकार की ओर से मंजूरी मिल गई है, लेकिन इसके विवरण को अभी अंतिम रूप दिया जाना बाकी है। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार के आदेश को नगर निगम की सामान्य प्रक्रिया से गुजरना होगा। इसका मतलब है कि सरकार की ओर से आदेश जारी होने के बावजूद जमीन आवंटन से जुड़ी प्रक्रिया पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। नगर निगम की स्थायी समिति के सामने प्रस्ताव रखा जाना और उसके बाद आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होना आगे की प्रक्रिया का हिस्सा है। अंतिम निर्णय के बाद ही आवंटन की शर्तों और उनके क्रियान्वयन की स्थिति स्पष्ट होगी।
TMC से अलग होने के बाद भी चर्चा में यूसुफ पठान
यूसुफ पठान वर्ष 2024 में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के टिकट पर पश्चिम बंगाल की बहरामपुर लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर संसद पहुंचे थे। अब जमीन आवंटन का मामला ऐसे समय में चर्चा में आया है, जब रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने तृणमूल कांग्रेस से अलग होकर बागी गुट के साथ नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में विलय कर लिया था। हालांकि, जमीन आवंटन की सरकारी प्रक्रिया और उनके राजनीतिक घटनाक्रम को अलग-अलग तथ्यों के रूप में देखना जरूरी है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, जमीन का मामला वर्ष 2012 से चला आ रहा है और इसमें नगर निगम, राज्य सरकार तथा अदालत की प्रक्रियाएं शामिल रही हैं।
