erer | Source: ereनई दिल्ली। दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के विरोध में हुए प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पुलिस हिरासत में प्रदर्शनकारियों के साथ कथित मारपीट का मुद्दा उठाया। इस दौरान उन्होंने कुछ छात्रों, महिला प्रदर्शनकारियों और बांसुरी वादक समर को मीडिया के सामने पेश किया। इन लोगों ने हिरासत के दौरान मारपीट, धमकी देने और दुर्व्यवहार करने जैसे गंभीर आरोप लगाए। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित पक्षों का जवाब सामने आना अभी जरूरी है।


प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बांसुरी वादक समर ने ‘वैष्णव जन तो तेने कहिए’ भजन की धुन बजाई। राहुल गांधी ने इस प्रस्तुति को कथित पुलिस कार्रवाई के विरोध में प्रतीकात्मक रूप से पेश किया। उन्होंने प्रदर्शनकारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार का मुद्दा उठाते हुए कहा, “डंडे का जवाब डंडे से।” उनके बयान और प्रेस कॉन्फ्रेंस में लगाए गए आरोपों के बाद जंतर-मंतर प्रदर्शन से जुड़ा विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है।

बांसुरी की धुन के साथ राहुल गांधी ने उठाया हिरासत में मारपीट का मुद्दा

राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में बांसुरी की धुन खास आकर्षण का केंद्र रही। समर ने महात्मा गांधी से जुड़ी पहचान रखने वाले भजन ‘वैष्णव जन तो तेने कहिए’ की धुन बजाई। राहुल गांधी ने इसे विरोध दर्ज कराने के एक प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया। उनका आरोप था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों और अन्य लोगों के साथ पुलिस हिरासत में अनुचित व्यवहार किया गया।

राहुल गांधी ने प्रदर्शनकारियों से कथित घटनाओं के वीडियो और अन्य साक्ष्य सुरक्षित रखने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि सभी लोग घटनाओं का रिकॉर्ड तैयार रखें और सबूत उनके पास भेजें, ताकि आगे जरूरत पड़ने पर उनका इस्तेमाल किया जा सके। उन्होंने इस मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही।

बांसुरी वादक समर ने पांच और 11 अक्टूबर की घटनाओं का किया जिक्र

प्रेस कॉन्फ्रेंस में समर ने दावा किया कि उन्हें पांच अक्टूबर को हिरासत में लिया गया था। उनके अनुसार, उस दौरान सादे कपड़ों में मौजूद पुलिसकर्मियों ने उनके साथ मारपीट की। समर ने यह भी कहा कि 11 अक्टूबर को उन्हें दोबारा हिरासत में लिया गया था।

समर ने आरोप लगाया कि बजरंग दल और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े लोगों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों को डंडों और पत्थरों से धमकाया था। उनके मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने इसकी जानकारी पुलिस को दी, लेकिन इसके बाद उन्हें ही हिरासत में ले लिया गया। उन्होंने यह दावा भी किया कि प्रदर्शनकारियों के मोबाइल फोन छीन लिए गए और उन्हें प्रारूपित कर दिया गया।

समर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि घटनास्थल पर कम से कम 15 महिलाएं भी मौजूद थीं। उन्होंने 20 जुलाई की एक अन्य घटना का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि उस समय रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के एक जवान ने उन्हें डंडे से मारा था। ये सभी आरोप समर की ओर से लगाए गए हैं। इनकी पुष्टि के लिए संबंधित घटनाओं की स्वतंत्र जांच और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण महत्वपूर्ण होगा।

महिला प्रदर्शनकारी ने महिला पुलिसकर्मी पर लगाया घसीटने का आरोप

राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में NSUI की एक महिला पदाधिकारी को भी सामने रखा। उन्होंने महिला प्रदर्शनकारी को ‘शेरनी’ बताते हुए कहा कि कथित मारपीट के बावजूद वह डरी नहीं। महिला पदाधिकारी ने आरोप लगाया कि हिरासत में लिए जाने के दौरान उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया।

महिला ने महिला कांस्टेबल चंचल यादव पर उन्हें घसीटकर कनॉट प्लेस थाने ले जाने का आरोप लगाया। उनके अनुसार, उन्हें थाने के कमरा नंबर 107 में ले जाया गया, जहां सादे कपड़ों में महिला पुलिसकर्मी मौजूद थीं। महिला प्रदर्शनकारी का दावा है कि कमरे के भीतर उनके साथ मारपीट की गई और इसके बाद उनके पैरों पर नीले निशान पड़ गए।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में लगाए गए इन आरोपों के बाद पुलिस की भूमिका और हिरासत के दौरान अपनाई गई प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए गए। हालांकि, आरोपों के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी नहीं माना जा सकता। मामले की वास्तविक स्थिति संबंधित पक्षों के बयान, उपलब्ध रिकॉर्ड और जांच के नतीजों से ही स्पष्ट होगी।

केरल की छात्रा ने कान से सुनाई देना बंद होने का किया दावा

राहुल गांधी ने केरल की एक छात्रा को भी मीडिया के सामने पेश किया। छात्रा ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उसके साथ इतनी मारपीट की कि उसका एक कान प्रभावित हो गया और उससे सुनाई देना बंद हो गया। यह आरोप गंभीर है और इसकी पुष्टि के लिए चिकित्सकीय जांच तथा अन्य साक्ष्य महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में अलग-अलग प्रदर्शनकारियों की ओर से लगाए गए आरोपों ने हिरासत के दौरान कथित पुलिस व्यवहार को लेकर बहस तेज कर दी है। राहुल गांधी ने इन लोगों की बातों को सामने रखते हुए कहा कि प्रदर्शनकारियों को अपने साथ हुई घटनाओं के प्रमाण सुरक्षित रखने चाहिए। उन्होंने वीडियो रिकॉर्डिंग और दूसरे साक्ष्यों को भविष्य की कार्रवाई के लिए महत्वपूर्ण बताया।

छात्र का आरोप- संसद मार्ग थाने से दिल्ली गेट तक गाड़ी में पीटा गया

प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक छात्र ने पुलिस पर मारपीट, गाली-गलौज और धमकी देने के आरोप लगाए। छात्र के मुताबिक, उसके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी में कई 18 से 19 वर्ष के युवक भी शामिल हैं। उसने दावा किया कि संसद मार्ग थाने के बाहर हिरासत में लेते समय पुलिसकर्मियों ने उनसे कहा कि उन्हें नेता बनाया जाएगा।

छात्र ने आरोप लगाया कि संसद मार्ग थाने से दिल्ली गेट तक वाहन में ले जाते समय उनके साथ मारपीट की गई। उसके मुताबिक, पुलिसकर्मियों ने उन्हें गालियां दीं और धमकाया। उसने यह भी दावा किया कि तिहाड़ जेल भेजे जाने के समय उसकी हालत गंभीर थी और वह बेहोशी की स्थिति में व्हीलचेयर पर चल रहा था।

छात्र ने कहा कि उसे अदालत में पेश किया गया, लेकिन उसके अनुसार, उसकी चोटों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। उसने आरोप लगाया कि हिरासत के दौरान प्रदर्शनकारियों के साथ ऐसा व्यवहार किया गया, जो नहीं होना चाहिए। छात्र ने मीडिया और संबंधित लोगों से इन घटनाओं की जांच करने तथा कथित दुर्व्यवहार को सामने लाने की अपील की।

इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी आवश्यक है। हिरासत में चोट लगने, पुलिसकर्मियों के व्यवहार और चिकित्सकीय सहायता से जुड़े दावों की जांच संबंधित दस्तावेजों, चिकित्सा रिपोर्टों, उपलब्ध वीडियो और अन्य साक्ष्यों के आधार पर की जा सकती है।

राहुल गांधी की पुलिसकर्मियों और शीर्ष अधिकारियों को चेतावनी

राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि प्रदर्शनकारियों को अपनी आवाज उठाने का अधिकार है और सरकार को उनकी बात सुननी चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का नाम लेते हुए कहा कि देश में विरोध की आवाज को दबाया नहीं जा सकता।

राहुल गांधी ने पुलिसकर्मियों से भी अपील की कि वे प्रदर्शनकारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार से जुड़े मामलों में सामने आए तथ्यों को गंभीरता से लें। उन्होंने छात्रों से कहा कि वे अपने पास मौजूद वीडियो और अन्य साक्ष्य सुरक्षित रखें तथा उन्हें साझा करें।

उन्होंने कहा, “ये हिंदुस्तान है। अमित शाह जी इसको अच्छी तरह देख लीजिए। यहां कोई हिंदू नहीं है, कोई मुस्लिम नहीं है, कोई किसी जात का नहीं है, कोई स्त्री नहीं है, कोई पुरुष नहीं है। एक आवाज है, एक प्रोटेस्ट है, हिंदुस्तान की आवाज है और आप प्रधानमंत्री जी इस आवाज के सामने खड़े हैं। मैं आपको सुझाव देता हूं, इस आवाज के सामने खड़े मत होइए। इस आवाज के सामने कोई खड़ा नहीं हो सकता है।”

राहुल गांधी ने आगे कहा कि उन्होंने छात्रों से घटनाओं का वीडियो रिकॉर्ड रखने और साक्ष्य सुरक्षित करने को कहा है। उन्होंने कहा, “जब ये पूरा का पूरा मामला खत्म होगा, तो फिर पूरा एविडेंस का हम प्रयोग करेंगे और जिनको सजा देनी होगी, सबको सजा देंगे, ज्ञानेश कुमार से लेकर ऊपर से नीचे तक। नरेंद्र मोदी, ज्ञानेश कुमार, अमित शाह और जो भी मतलब कॉन्स्टेबल हमारे बच्चों पे हाथ उठा रहा है। सारा का सारा सबूत रखिए और घबराइए मत।”

जंतर-मंतर प्रदर्शन से जुड़ा विवाद क्यों हुआ तेज?

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन और उसके बाद हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक बहस लगातार तेज हो रही है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और SIR प्रक्रिया के विरोध में प्रदर्शन कर रहे लोगों की गिरफ्तारी, हिरासत और कथित दुर्व्यवहार के आरोप इस विवाद के केंद्र में हैं। राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस ने इन मुद्दों को फिर से राष्ट्रीय राजनीतिक चर्चा में ला दिया है।

एक ओर प्रदर्शनकारियों की ओर से हिरासत में मारपीट और धमकी देने के आरोप लगाए गए हैं, वहीं इन आरोपों की पुष्टि के लिए निष्पक्ष जांच और साक्ष्यों का परीक्षण आवश्यक है। पुलिस का पक्ष सामने आने और संबंधित घटनाओं की परिस्थितियां स्पष्ट होने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकेगी।

सबूतों की जांच और जिम्मेदारी तय होने पर टिकी निगाहें

राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि वह कथित पुलिस कार्रवाई से जुड़े साक्ष्यों को भविष्य में इस्तेमाल करना चाहते हैं और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करेंगे। प्रेस कॉन्फ्रेंस में छात्रों, महिला प्रदर्शनकारियों और बांसुरी वादक समर ने अपने अनुभव साझा किए, जबकि राहुल गांधी ने उनके आरोपों को राजनीतिक और कानूनी जवाबदेही से जोड़कर उठाया।

फिलहाल इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि प्रदर्शनकारियों की ओर से लगाए गए आरोपों की जांच किस तरह होती है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर क्या निष्कर्ष निकलते हैं। आरोपों की निष्पक्ष जांच, संबंधित पक्षों का जवाब और तथ्यों के आधार पर जिम्मेदारी तय होना ही इस विवाद को स्पष्ट दिशा दे सकता है।