erer | Source: erereपटना। बिहार में निवेश को बढ़ावा देने और औद्योगिक गतिविधियों को विस्तार देने की कोशिशों के बीच नीति आयोग की जुलाई 2026 में जारी निवेश अनुकूल सूचकांक रिपोर्ट ने राज्य के लिए चिंता बढ़ाने वाली तस्वीर पेश की है। 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की सूची में बिहार को 26वां स्थान मिला है। वहीं देश के 17 बड़े राज्यों की श्रेणी में बिहार सबसे निचले यानी 17वें स्थान पर रहा। 100 अंकों के पैमाने पर राज्य को केवल 41.2 अंक मिले हैं।

निवेश के मामले में बिहार को क्यों मिला निचला स्थान?

नीति आयोग के मूल्यांकन में निवेश के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं को शामिल किया गया है। बिहार की स्थिति आधारभूत संरचना, संसाधनों की उपलब्धता, कारोबारी माहौल और भूमि आवंटन जैसी चुनौतियों से प्रभावित बताई गई है। रिपोर्ट के अनुसार राज्य में भूमि आवंटन की प्रक्रिया जटिल है, जबकि रोजगार के अवसर भी सीमित हैं।

इसके अलावा राज्य के दूसरे और तीसरे स्तर के शहरों में हवाई संपर्क की कमी, बिजली की निर्बाध उपलब्धता से जुड़ी जरूरतें तथा निवेश आकर्षित करने के लिए सुरक्षा और संरक्षा पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता भी सामने आई है।

चार श्रेणियों में बांटे गए राज्यों में बिहार तीसरी श्रेणी में

नीति आयोग ने राज्यों के प्रदर्शन के आधार पर उन्हें चार अलग-अलग श्रेणियों में रखा है। बिहार को 40 से 45 अंक वाली तीसरी श्रेणी में शामिल किया गया है। इस श्रेणी में बिहार के साथ झारखंड, पंजाब, पश्चिम बंगाल, जम्मू-कश्मीर, मेघालय, नागालैंड और पुदुचेरी भी शामिल हैं।

वहीं 50 से अधिक अंक हासिल करने वाले उच्च प्रदर्शन वाले राज्यों में गोवा, गुजरात, महाराष्ट्र, ओडिशा और तमिलनाडु शामिल हैं। इन राज्यों ने निवेश के लिए बेहतर वातावरण तैयार करने के मामले में शीर्ष श्रेणी में जगह बनाई है।

गुजरात बना शीर्ष राज्य, महाराष्ट्र और तमिलनाडु भी आगे

निवेश अनुकूल सूचकांक की समग्र रैंकिंग में गुजरात, महाराष्ट्र और तमिलनाडु शीर्ष तीन स्थानों पर रहे। इन राज्यों के प्रदर्शन से पता चलता है कि निवेश आकर्षित करने के लिए आधारभूत संरचना, कारोबारी माहौल, सरकारी नीतियों और अन्य संबंधित क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन का महत्व है।

बिहार की तुलना में इन शीर्ष राज्यों का प्रदर्शन कई प्रमुख मानकों पर अधिक मजबूत रहा है। नीति आयोग ने राज्यों की निवेश तैयारियों को अलग-अलग मानकों पर परखने के बाद यह रैंकिंग तैयार की है।

विदेशी निवेश के आंकड़े भी बिहार के लिए चिंता बढ़ाने वाले

रिपोर्ट में बिहार में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश यानी एफडीआई की स्थिति भी कमजोर बताई गई है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में बिहार में एफडीआई केवल 0.16 मिलियन डॉलर रहा। इसके मुकाबले महाराष्ट्र में 15,116 मिलियन डॉलर, दिल्ली में 6,523.43 मिलियन डॉलर और कर्नाटक में 6,571 मिलियन डॉलर का एफडीआई दर्ज किया गया।

रिपोर्ट के अनुसार देश में आने वाले कुल एफडीआई का लगभग 85 प्रतिशत हिस्सा महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात, दिल्ली और तमिलनाडु में केंद्रित है। ऐसे में बिहार के सामने विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए अपने निवेश वातावरण को मजबूत करने की बड़ी चुनौती दिखाई देती है।

पेटेंट के मामले में भी बिहार पीछे

निवेश और नवाचार से जुड़े एक अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्र में भी बिहार की स्थिति बेहतर नहीं रही। वित्तीय वर्ष 2023 में कंपनियों की ओर से दाखिल किए गए कुल पेटेंट में बिहार की हिस्सेदारी केवल 0.48 प्रतिशत रही। बड़े राज्यों में पेटेंट दाखिल करने की औसत हिस्सेदारी 3.6 प्रतिशत बताई गई है।

पेटेंट गतिविधि को औद्योगिक और तकनीकी नवाचार के महत्वपूर्ण संकेतकों में माना जाता है। ऐसे में बिहार में इस क्षेत्र में हिस्सेदारी बढ़ाना भी निवेश वातावरण को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।

रिपोर्ट ने औद्योगिक पार्क और आधारभूत ढांचे पर दिया जोर

नीति आयोग की रिपोर्ट में बिहार में निवेश का माहौल सुधारने के लिए समर्पित औद्योगिक पार्क विकसित करने और औद्योगिक आधारभूत संरचना को मजबूत करने की सलाह दी गई है। इसके साथ ही सुरक्षा और संरक्षा पर विशेष ध्यान देने की जरूरत भी बताई गई है।

इन क्षेत्रों में सुधार से राज्य में निवेशकों के लिए अनुकूल परिस्थितियां तैयार करने में मदद मिल सकती है। हालांकि रिपोर्ट में सामने आए सुझावों को लागू करने की जिम्मेदारी राज्य स्तर पर संबंधित नीतियों और योजनाओं के माध्यम से आगे बढ़ानी होगी।

आठ प्रमुख मानकों पर हुआ राज्यों का मूल्यांकन

नीति आयोग ने निवेश अनुकूल सूचकांक तैयार करने के लिए राज्यों का मूल्यांकन आठ प्रमुख मानकों पर किया। इनमें आधारभूत संरचना, कारोबारी माहौल, संसाधनों की उपलब्धता, सरकारी नीतियां, विनियामक सुगमता, राज्यों की वित्तीय सेहत, संस्थागत वातावरण और पर्यावरणीय मजबूती शामिल हैं।

इन सभी मानकों को अलग-अलग भारांक दिया गया है। इसी आधार पर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रदर्शन का आकलन किया गया है। बिहार कई क्षेत्रों में अपेक्षाकृत कमजोर प्रदर्शन के कारण समग्र सूची में 26वें स्थान पर रहा।

आधारभूत संरचना में बिहार 11वें स्थान पर

आधारभूत संरचना को सूचकांक में 25 प्रतिशत भारांक दिया गया है। इस श्रेणी में गुजरात ने 13.7 अंक के साथ शीर्ष स्थान हासिल किया। तमिलनाडु को 13.6 और कर्नाटक को 12.6 अंक मिले। बिहार को 10.9 अंक मिले और वह इस मानक में 11वें स्थान पर रहा।

इससे स्पष्ट होता है कि आधारभूत संरचना के क्षेत्र में बिहार की स्थिति समग्र रैंकिंग की तुलना में बेहतर है, लेकिन शीर्ष राज्यों तक पहुंचने के लिए अभी अंतर बना हुआ है।

कारोबारी माहौल में बिहार 15वें स्थान पर

कारोबारी माहौल को कुल सूचकांक में 20 प्रतिशत भारांक दिया गया है। इस श्रेणी में महाराष्ट्र 9.4 अंक के साथ पहले स्थान पर रहा। कर्नाटक को 9.3 और तमिलनाडु को 9.2 अंक मिले। बिहार को 5.2 अंक मिले और वह 15वें स्थान पर रहा।

कारोबार के लिए अनुकूल परिस्थितियां निवेशकों के निर्णय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। भूमि आवंटन, नियामकीय प्रक्रिया और अन्य कारोबारी सुविधाओं से जुड़े विषय इस क्षेत्र की स्थिति को प्रभावित करते हैं।

संसाधनों की उपलब्धता में भी बिहार पीछे

संसाधनों की उपलब्धता वाले मानक को 15 प्रतिशत भारांक दिया गया है। ओडिशा 8.2 अंक के साथ पहले स्थान पर रहा, जबकि महाराष्ट्र को 8.1 और छत्तीसगढ़ को 8.0 अंक मिले। बिहार के खाते में 5.2 अंक आए और वह 15वें स्थान पर रहा।

यह श्रेणी निवेश के लिए आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता और उनके उपयोग से जुड़ी स्थिति का आकलन करती है।

सरकारी नीतियों में बिहार 15वें पायदान पर

सरकारी नीतियों को सूचकांक में 10 प्रतिशत भारांक दिया गया है। मध्य प्रदेश 5.4 अंक के साथ इस श्रेणी में पहले स्थान पर रहा। गुजरात को 5.1 और राजस्थान को 4.8 अंक मिले। बिहार को 2.3 अंक मिले और वह 15वें स्थान पर रहा।

राज्य में निवेश को बढ़ावा देने वाली नीतियों और उनके प्रभावी क्रियान्वयन को इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण माना गया है।

विनियामक सुगमता में बिहार का 14वां स्थान

विनियामक सुगमता को 12 प्रतिशत भारांक दिया गया है। इस श्रेणी में छत्तीसगढ़ 8.4 अंक के साथ शीर्ष पर रहा। राजस्थान और पंजाब को 8.1-8.1 अंक मिले। बिहार ने 7.0 अंक हासिल किए और 14वें स्थान पर रहा।

निवेशकों और कारोबारियों के लिए नियमों तथा प्रक्रियाओं को सरल और सुगम बनाना निवेश वातावरण का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

वित्तीय सेहत में बिहार 12वें स्थान पर

राज्यों की वित्तीय सेहत को सूचकांक में 7 प्रतिशत भारांक मिला है। छत्तीसगढ़ 4.5 अंक के साथ पहले स्थान पर रहा। पंजाब को 4.3 और मध्य प्रदेश को 4.2 अंक मिले। बिहार ने 3.8 अंक हासिल किए और 12वें स्थान पर रहा।

वित्तीय स्थिति किसी राज्य की निवेश क्षमता और विकास संबंधी गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण आधार मानी जाती है।

संस्थागत वातावरण में 13वां स्थान

संस्थागत वातावरण को सूचकांक में 6 प्रतिशत भारांक दिया गया है। गुजरात 6.7 अंक के साथ पहले स्थान पर रहा। ओडिशा को 6.5 और महाराष्ट्र को 6.3 अंक मिले। बिहार को 4 अंक प्राप्त हुए और वह 13वें स्थान पर रहा।

संस्थागत व्यवस्था निवेशकों के लिए नीतिगत स्थिरता और प्रशासनिक वातावरण से जुड़ी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

पर्यावरणीय मजबूती में बिहार सबसे नीचे

पर्यावरणीय मजबूती को सूचकांक में 5 प्रतिशत भारांक दिया गया है। तमिलनाडु और छत्तीसगढ़ ने 4-4 अंक के साथ शीर्ष स्थान साझा किया। केरल को 3.9 अंक मिले। बिहार को इस मानक में 2.7 अंक प्राप्त हुए और वह 17वें स्थान पर रहा।

यह मानक निवेश और विकास के साथ पर्यावरणीय परिस्थितियों को संतुलित रखने की क्षमता से जुड़ा है।

निवेश तैयारियों का पहला व्यापक मूल्यांकन

नीति आयोग ने जुलाई 2026 में पहली बार राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की निवेश तैयारियों का मूल्यांकन करते हुए यह रिपोर्ट और रैंकिंग जारी की है। इसमें देश के सभी 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों को अलग-अलग श्रेणियों के तहत शामिल किया गया है।

इस सूचकांक का उद्देश्य राज्यों में निवेशकों और कारोबारियों के लिए उपलब्ध वातावरण का आकलन करना है। इसके माध्यम से उन क्षेत्रों की पहचान करने की कोशिश की गई है, जहां राज्यों को निवेश आकर्षित करने और निवेश पारिस्थितिकी तंत्र मजबूत करने के लिए सुधार की आवश्यकता है।

बिहार के लिए रिपोर्ट का संदेश क्या है?

नीति आयोग की रिपोर्ट में बिहार की स्थिति कई क्षेत्रों में सुधार की जरूरत की ओर संकेत करती है। भूमि आवंटन की प्रक्रिया को सरल बनाने, औद्योगिक आधारभूत ढांचे को मजबूत करने, बिजली की उपलब्धता बेहतर करने, हवाई संपर्क बढ़ाने और निवेशकों के लिए सुरक्षा तथा संरक्षा पर ध्यान देने जैसे विषय प्रमुख हैं।

एफडीआई और पेटेंट के आंकड़े भी राज्य के सामने मौजूद चुनौतियों को रेखांकित करते हैं। वहीं आधारभूत संरचना जैसे कुछ मानकों में बिहार की स्थिति समग्र रैंकिंग की तुलना में बेहतर रही है।