
छतरपुर में केन-बेतवा परियोजना के विरोध में प्रतीकात्मक फांसी सत्याग्रह करतीं आदिवासी महिलाएं।Source : Chrome
मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना को लेकर विरोध प्रदर्शन लगातार तेज होता जा रहा है। अब परियोजना से प्रभावित आदिवासी महिलाओं ने आंदोलन को नया स्वरूप देते हुए प्रतीकात्मक 'फांसी सत्याग्रह' शुरू किया है। उनका कहना है कि यदि सरकार उन्हें सम्मानजनक पुनर्वास और न्याय नहीं दे सकती, तो उन्हें इच्छामृत्यु की अनुमति दी जाए। यह आंदोलन पिछले कई दिनों से जारी है और प्रभावित परिवार अपनी मांगों को लेकर लगातार धरने पर बैठे हैं।
आंदोलन ने लिया नया रूप
छतरपुर के कूपी गांव के पास बराना नदी किनारे चल रहे आंदोलन में आदिवासी महिलाओं ने गले में फांसी का फंदा डालकर विरोध दर्ज कराया। उनका कहना है कि विस्थापन के बाद उनका भविष्य असुरक्षित हो गया है और अब उनके पास आंदोलन का रास्ता ही बचा है। यह धरना अब अपने दसवें दिन में पहुंच चुका है।
पहले जल और चिता सत्याग्रह, अब फांसी सत्याग्रह
परियोजना का विरोध कर रहे प्रभावित परिवार इससे पहले जल सत्याग्रह और चिता सत्याग्रह भी कर चुके हैं। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अमित भटनागर पिछले पांच दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। उनका आरोप है कि प्रशासन ने अप्रैल में जो आश्वासन दिए थे, वे अब तक पूरे नहीं किए गए।
विस्थापन और पुनर्वास को लेकर नाराजगी
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि परियोजना के कारण हजारों परिवार अपनी जमीन, जंगल, जल स्रोत और आजीविका खोने की कगार पर हैं। उनका आरोप है कि कई लोगों को बिना उचित प्रक्रिया के बेदखल किया गया, कुछ पर झूठे मुकदमे दर्ज किए गए और कई परिवारों के बिजली कनेक्शन तक काट दिए गए।आंदोलनकारियों का यह भी कहना है कि प्रभावित परिवारों की सूची तैयार करने में अनियमितताएं हुई हैं। उनके अनुसार, मैनारी गांव के 114 लोगों के नाम अब भी सूची में शामिल नहीं किए गए हैं, जिससे वे पुनर्वास और मुआवजे से वंचित हैं।
प्रशासन ने क्या कहा?
छतरपुर कलेक्टर पार्थ जायसवाल का कहना है कि प्रशासन लगातार प्रदर्शनकारियों के संपर्क में है और उनकी मांगों पर बातचीत जारी है। उन्होंने बताया कि अप्रैल में उठाई गई अधिकांश मांगों पर कार्रवाई की जा चुकी है। साथ ही राज्य सरकार ने हाल ही में राहत और पुनर्वास पैकेज में बढ़ोतरी को भी मंजूरी दी है। हालांकि प्रदर्शनकारी अब इससे अधिक मुआवजे और व्यापक पुनर्वास की मांग कर रहे हैं।
क्या है केन-बेतवा परियोजना?
केन-बेतवा लिंक परियोजना देश की पहली बड़ी नदी जोड़ो परियोजना मानी जाती है। करीब 44,605 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना का उद्देश्य सिंचाई सुविधाओं का विस्तार करना, लाखों लोगों तक पेयजल पहुंचाना और बिजली उत्पादन बढ़ाना है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इससे 10.62 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई, करीब 62 लाख लोगों को पेयजल और 130 मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।
ग्रामीणों की मुख्य मांग क्या है?
प्रभावित ग्रामीणों का कहना है कि बांध निर्माण से पहले सभी परिवारों का पारदर्शी और सम्मानजनक पुनर्वास सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने सरकार से प्रभावित लोगों की पूरी सूची सार्वजनिक करने, उचित मुआवजा देने और आंदोलन कर रहे लोगों पर किसी तरह का दबाव या कार्रवाई नहीं करने की मांग की है।
