नई दिल्ली: जोधपुर और आसपास के क्षेत्रों की जीवनरेखा मानी जाने वाली जोजरी नदी में लगातार बढ़ते प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को राजस्थान सरकार को कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने विशेष जांच दल (SIT) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए उसकी जांच को “महज दिखावा” करार दिया और कहा कि विशेषज्ञ समिति की ताजा रिपोर्ट से साफ है कि नदी में अब भी अत्यधिक अम्लीय (Acidic) पानी बह रहा है।
SIT की जांच पर सुप्रीम कोर्ट सख्त
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, संदीप मेहता और आर. महादेवन की पीठ ने कहा कि यदि कोई राज्य अपने ही नागरिकों को प्रदूषण के जरिए नुकसान पहुंचने दे, तो यह बेहद गंभीर स्थिति है। अदालत ने टिप्पणी की कि अब तक की जांच से यह नहीं लगता कि SIT ने प्रभावी कार्रवाई की है।
विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट में गंभीर खुलासे
सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति संगीत लोढ़ा की अध्यक्षता वाली विशेषज्ञ समिति ने अपनी दूसरी रिपोर्ट में बताया कि जोजरी नदी के कई हिस्सों में अब भी तेज दुर्गंध है और पानी अत्यधिक अम्लीय पाया गया है। रिपोर्ट में कहा गया कि केवल नदी की सफाई पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि सभी वैध और अवैध अपशिष्ट निकासी बिंदुओं की पहचान कर उन्हें बंद करना जरूरी है।
राज्य सरकार ने बताई कार्रवाई
राजस्थान सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि SIT का गठन किया जा चुका है और राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कुछ अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की है। साथ ही कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP) की निगरानी से जुड़े कुछ क्षेत्रीय अधिकारियों को निलंबित भी किया गया है।
कोर्ट ने जवाबों पर जताई नाराजगी
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि विशेषज्ञ समिति द्वारा मांगी गई जानकारी समय पर उपलब्ध नहीं कराई गई। कोर्ट ने यह भी कहा कि समिति को कथित तौर पर उस पाइपलाइन की जांच से रोकने की कोशिश की गई, जिसके जरिए औद्योगिक अपशिष्ट नदी में छोड़े जाने की आशंका है। अदालत ने इस पर गंभीर चिंता जताई।
मुख्य सचिव होंगे जवाबदेह
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अब उसके निर्देशों के पालन के लिए राजस्थान के मुख्य सचिव व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे। अदालत ने कहा कि किसी भी स्थिति में नागरिकों के स्वास्थ्य से समझौता नहीं किया जाएगा और नदी में प्रदूषण रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने होंगे।
औद्योगिक इकाइयों पर भी सख्ती
अदालत को बताया गया कि फिलहाल नदी किनारे स्थित सभी उद्योग बंद हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि कोई उद्योग दोबारा संचालन चाहता है तो उसे विशेषज्ञ समिति को यह भरोसा दिलाना होगा कि उसका संचालन पर्यावरणीय मानकों और अदालत के निर्देशों के अनुरूप होगा।
औद्योगिक पार्क परियोजना पर रोक
विशेषज्ञ समिति के हस्तक्षेप के बाद काकानी में प्रस्तावित औद्योगिक पार्क परियोजना को भी फिलहाल रोक दिया गया है। समिति का कहना है कि यह परियोजना नदी के बाढ़ क्षेत्र और बफर जोन को प्रभावित कर सकती थी, जिससे नदी पुनर्जीवन अभियान पर असर पड़ने की आशंका थी।
