erer | Source: ererनई दिल्ली। भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल को लेकर विवाद एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर चर्चा में आ गया है। किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन यानी एससीओ के शिखर सम्मेलन में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सिंधु जल संधि का मुद्दा उठाया। उन्होंने पानी को क्षेत्र के लिए जीवन-रेखा बताते हुए कहा कि साझा जल संसाधनों का इस्तेमाल दबाव बनाने या राजनीतिक लाभ हासिल करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।

एससीओ सम्मेलन में पाकिस्तान ने उठाया सिंधु जल का मुद्दा

शहबाज शरीफ ने एससीओ शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए सिंधु जल संधि से जुड़े पाकिस्तान के पक्ष को सामने रखा। उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब भारत स्थायी मध्यस्थता अदालत के उस आदेश को पहले ही खारिज कर चुका है, जिसमें पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि को स्थगित करने के भारत के फैसले को रद्द करने की बात कही गई थी।

भारत ने इस संस्था की वैधता पर सवाल उठाते हुए इसे ''गैर-कानूनी तरीके से गठित'' संस्था बताया है। भारत का कहना है कि ऐसी संस्था को नई दिल्ली के संप्रभु फैसलों पर निर्णय देने का अधिकार नहीं है।

शहबाज शरीफ बोले- पानी क्षेत्र की जीवन-रेखा

डॉन अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, बिश्केक में एससीओ सम्मेलन के दौरान शहबाज शरीफ ने कहा कि क्षेत्र स्थायी शांति के बिना अपनी पूरी क्षमता हासिल नहीं कर सकता। सिंधु जल संधि के संदर्भ में उन्होंने पानी को बेहद महत्वपूर्ण संसाधन बताया।

शरीफ ने कहा, ''पानी हमारे क्षेत्र की जीवन-रेखा है। यह लाखों लोगों के जीवन के लिए जरूरी है, यह हमारी जमीन को उपजाऊ बनाता है और हमारी आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित करता है।''

उन्होंने आगे कहा कि पानी का इस्तेमाल कभी भी हथियार के तौर पर नहीं किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, इसका इस्तेमाल दबाव बनाने के लिए नहीं किया जा सकता और न ही राजनीतिक लाभ हासिल करने के लिए इसका दुरुपयोग किया जाना चाहिए।

भारत ने पिछले साल स्थगित की थी सिंधु जल संधि

भारत ने अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को स्थगित कर दिया था। इस हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी। भारत ने हमले के बाद पाकिस्तान के खिलाफ कई दंडात्मक कूटनीतिक कदम उठाए थे, जिनमें सिंधु जल संधि को स्थगित करने का फैसला भी शामिल था।

पाकिस्तान लगातार इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाता रहा है। एससीओ सम्मेलन में भी शहबाज शरीफ ने इसी संदर्भ में जल संसाधनों से जुड़े अंतरराष्ट्रीय समझौतों की बाध्यता पर जोर दिया।

पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं का दिया हवाला

शहबाज शरीफ ने कहा कि साझा जल संसाधनों को नियंत्रित करने वाली संधियां गंभीर और बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताएं हैं। उनके मुताबिक इन्हें राजनीतिक सुविधा के आधार पर अपनी इच्छा के अनुसार दरकिनार नहीं किया जा सकता।

उन्होंने कहा कि ऐसी संधियों का बिना किसी शर्त के पालन किया जाना चाहिए। पाकिस्तान की ओर से यह बयान ऐसे समय दिया गया है जब भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि को लेकर विवाद जारी है।

हेग की स्थायी मध्यस्थता अदालत तक पहुंचा मामला

सिंधु जल संधि को लेकर पाकिस्तान ने इस साल मार्च में हेग स्थित स्थायी मध्यस्थता अदालत का रुख किया था। पाकिस्तान की कोशिश संधि की स्थिति से जुड़े विवाद को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने की थी। हालांकि, इस कदम को भारत की कार्रवाई को चुनौती देने के प्रयास के तौर पर भी देखा गया।

इसके बाद सिंधु जल संधि को लेकर दोनों देशों के बीच कूटनीतिक और कानूनी स्तर पर विवाद और स्पष्ट रूप से सामने आया। भारत ने स्थायी मध्यस्थता अदालत के अधिकार क्षेत्र को स्वीकार नहीं किया और उसके आदेश को खारिज कर दिया।

आतंकवाद पर भी बोले पाकिस्तानी प्रधानमंत्री

एससीओ सम्मेलन में शहबाज शरीफ ने आतंकवाद के मुद्दे पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने आतंकवाद को सबसे गंभीर खतरों में से एक बताया, जिसने पूरे क्षेत्र को अलग-अलग तरीकों से प्रभावित किया है।

शरीफ ने अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष के संदर्भ में पाकिस्तान की ओर से मध्यस्थता की कोशिशों का भी उल्लेख किया। इस दौरान प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से साझा किए गए एक वीडियो में शहबाज शरीफ को चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ बातचीत करते हुए देखा गया।

जिनपिंग और पुतिन समेत कई नेताओं के साथ दिखे शरीफ

एससीओ सम्मेलन के दौरान शहबाज शरीफ को चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ बातचीत करते हुए देखा गया। इसके अलावा वह रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और तुर्किये के राष्ट्रपति रजब तैयप एर्दोआन के साथ भी बैठे नजर आए।

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने ईरान, उज्बेकिस्तान, कजाकिस्तान, ताजिकिस्तान और बेलारूस के राष्ट्रपतियों के साथ अनौपचारिक बैठकों में भी हिस्सा लिया।

अगले एससीओ शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा पाकिस्तान

पाकिस्तान 2026-27 के लिए एससीओ की राष्ट्राध्यक्ष परिषद यानी सीएचएस की अध्यक्षता संभालने वाला है। इसके साथ ही अगले वर्ष होने वाले सीएचएस शिखर सम्मेलन की मेजबानी भी पाकिस्तान करेगा। इस तरह बिश्केक में आयोजित मौजूदा सम्मेलन पाकिस्तान के लिए संगठन के भीतर आगामी जिम्मेदारियों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण रहा।

सिंधु जल पर जारी है भारत-पाकिस्तान का विवाद

सिंधु जल संधि का मुद्दा भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से संवेदनशील विषय रहा है। पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा संधि स्थगित किए जाने के बाद यह विवाद और गंभीर हो गया। पाकिस्तान अब इसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाकर अपने पक्ष को रखने की कोशिश कर रहा है।

बिश्केक में शहबाज शरीफ का बयान भी इसी सिलसिले की कड़ी के रूप में सामने आया है। उन्होंने पानी को क्षेत्रीय शांति, कृषि और लोगों के जीवन से जोड़ते हुए साझा जल संसाधनों को राजनीतिक दबाव से अलग रखने की बात कही।