नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र के विश्व मानचित्र को अधिक संतुलित और भौगोलिक रूप से सटीक बनाने की पहल के बीच भारत ने अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को लेकर स्पष्ट रुख सामने रखा है। भारत ने संयुक्त राष्ट्र से कहा है कि प्रस्तावित विश्व मानचित्र में केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख समेत भारत के संप्रभु क्षेत्र को देश के आधिकारिक मानचित्र के अनुरूप ही प्रदर्शित किया जाना चाहिए। भारत ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि कश्मीर और लद्दाख का कोई भी गलत या भ्रामक चित्रण स्वीकार नहीं किया जाएगा।
विश्व मानचित्र सुधार प्रस्ताव पर भारत ने दिया समर्थन
संयुक्त राष्ट्र महासभा के 193 सदस्य देशों ने शुक्रवार को ‘मानचित्र में सुधार: वैश्विक मानचित्रण प्रतिनिधित्व में संतुलन कायम करना और दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों, विशेष रूप से अफ्रीका का समान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना’ शीर्षक वाले प्रस्ताव को भारी बहुमत से पारित किया। भारत ने भी इस प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया।
इस प्रस्ताव का उद्देश्य विश्व मानचित्रों में महाद्वीपों और उनके भूभागों को इस तरह प्रदर्शित करने को बढ़ावा देना है, जिससे अलग-अलग क्षेत्रों के वास्तविक क्षेत्रफल का अनुपात अधिक सटीक रूप से सामने आए। प्रस्ताव को टोगो की ओर से पेश किया गया था।
भारत ने समर्थन के साथ साफ कर दी अपनी शर्त
प्रस्ताव के पक्ष में मतदान करने के बाद भारत ने यह भी स्पष्ट किया कि उसका समर्थन किसी खास विश्व मानचित्र, मानचित्रण तकनीक या किसी देश की सीमा के विशेष चित्रण के समर्थन के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। भारत ने विशेष रूप से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के चित्रण को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट की है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत ने मतदान के दौरान ‘इक्वल एरिया’ मानचित्रण पद्धतियों को बढ़ावा देने के मूल सिद्धांत पर जोर दिया। इस तरह की मानचित्रण पद्धतियों में विभिन्न महाद्वीपों के भूभाग के वास्तविक क्षेत्रफल के बीच का अनुपात बनाए रखने का प्रयास किया जाता है।
कश्मीर और लद्दाख पर भारत का रुख अडिग
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मीडिया के सवाल का जवाब देते हुए कहा कि केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख समेत भारत के संप्रभु क्षेत्र को भारत के आधिकारिक मानचित्र के अनुरूप दिखाया जाना चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत किसी भी गलत या भ्रामक चित्रण को स्वीकार नहीं करेगा। जायसवाल ने यह भी कहा कि भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को लेकर देश का रुख स्पष्ट और अडिग है तथा इस मामले में किसी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता।
आखिर UN के प्रस्ताव में क्या कहा गया है?
संयुक्त राष्ट्र महासभा का यह प्रस्ताव मुख्य रूप से विश्व मानचित्रों में भौगोलिक प्रतिनिधित्व को बेहतर बनाने से संबंधित है। रणधीर जायसवाल के अनुसार, प्रस्ताव का उद्देश्य ऐसी ‘इक्वल एरिया’ मानचित्रण पद्धतियों के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है, जिनमें विभिन्न महाद्वीपों के भूभाग के आपसी क्षेत्रफल का वास्तविक अनुपात बना रहता है।
इसका मतलब यह है कि मानचित्र पर किसी क्षेत्र को उसकी वास्तविक भौगोलिक स्थिति और क्षेत्रफल के अनुपात के अधिक करीब दिखाने वाली पद्धतियों को प्रोत्साहित किया जाएगा। हालांकि भारत ने साफ किया है कि इस प्रस्ताव का दायरा राजनीतिक सीमाओं के निर्धारण या किसी विवादित क्षेत्र पर किसी देश के दावे को मान्यता देने से संबंधित नहीं है।
प्रस्ताव किसी खास विश्व मानचित्र को प्रमाणित नहीं करता
भारत की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया कि संयुक्त राष्ट्र का प्रस्ताव किसी एक विशेष विश्व मानचित्र को अपनाने या प्रमाणित करने की बात नहीं करता। इसी तरह यह अंतरराष्ट्रीय सीमाओं, विवादित क्षेत्रों या स्थानों के नाम से संबंधित राजनीतिक मानचित्रण का फैसला भी नहीं करता।
इसलिए भारत ने प्रस्ताव का समर्थन करते हुए यह स्पष्ट किया है कि विश्व मानचित्र को बेहतर बनाने की पहल और भारत की संप्रभुता तथा क्षेत्रीय अखंडता से जुड़े उसके आधिकारिक मानचित्र के बीच अंतर को समझना जरूरी है।
164 देशों ने प्रस्ताव के पक्ष में किया मतदान
टोगो की ओर से पेश किए गए इस प्रस्ताव को संयुक्त राष्ट्र महासभा में व्यापक समर्थन मिला। कुल 164 देशों ने प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया। इससे पता चलता है कि विश्व मानचित्रों में भौगोलिक प्रतिनिधित्व को अधिक संतुलित बनाने की पहल को बड़ी संख्या में देशों का समर्थन मिला।
वहीं छह देशों—एस्टोनिया, जॉर्जिया, लिथुआनिया, मोल्दोवा, सर्बिया और यूक्रेन—ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया। अमेरिका ने प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया और वह इसके विरोध में मतदान करने वाला एकमात्र देश रहा।
भारत ने क्यों महत्वपूर्ण माना ‘इक्वल एरिया’ सिद्धांत?
विश्व के अलग-अलग हिस्सों को मानचित्र पर प्रदर्शित करने के लिए अलग-अलग मानचित्रण पद्धतियों का इस्तेमाल किया जाता है। कुछ पद्धतियों में आकार और क्षेत्रफल के वास्तविक अनुपात में अंतर दिखाई दे सकता है। ‘इक्वल एरिया’ पद्धति का उद्देश्य अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों के क्षेत्रफल को उनके वास्तविक अनुपात के अधिक करीब रखना है।
भारत ने इसी मूल सिद्धांत के समर्थन में मतदान किया है। लेकिन साथ ही विदेश मंत्रालय ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारत के संप्रभु क्षेत्र का चित्रण उसके आधिकारिक मानचित्र के अनुरूप होना चाहिए।
संप्रभुता के मुद्दे पर भारत का स्पष्ट संदेश
भारत का यह बयान ऐसे समय आया है जब संयुक्त राष्ट्र महासभा ने विश्व मानचित्रों के प्रतिनिधित्व को बेहतर बनाने से जुड़े प्रस्ताव को भारी बहुमत से पारित किया है। भारत ने प्रस्ताव का समर्थन किया, लेकिन जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के चित्रण को लेकर अपनी स्थिति भी स्पष्ट रूप से सामने रखी।
नई दिल्ली ने कहा है कि भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर उसका रुख स्पष्ट है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, देश अपने संप्रभु क्षेत्र के किसी भी गलत या भ्रामक चित्रण को स्वीकार नहीं करेगा।
