भारत की अर्थव्यवस्था

भारत की अर्थव्यवस्था

पटना। वैश्विक स्तर पर युद्ध, भू-राजनीतिक तनाव, ऊर्जा संकट, आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और आर्थिक अनिश्चितता के बीच भारत की अर्थव्यवस्था ने मजबूत प्रदर्शन किया है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत की वास्तविक GDP में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज होने पर बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने इसे देश की मजबूत आर्थिक बुनियाद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लागू नीतियों का परिणाम बताया है।

सरावगी ने कहा कि जब दुनिया की अर्थव्यवस्था विभिन्न संकटों से प्रभावित है, ऐसे समय में भारत का 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ना देश की आर्थिक क्षमता और आत्मविश्वास को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था की औसत वृद्धि करीब 3 प्रतिशत के आसपास रहने के बीच भारत की विकास दर काफी अधिक है। पिछले वर्ष की इसी तिमाही में GDP वृद्धि दर 6.9 प्रतिशत थी।

उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में संघर्ष, ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक व्यापारिक तनाव जैसी परिस्थितियों के बावजूद भारत की विकास गति बनी हुई है। उनके अनुसार यह उपलब्धि किसी एक क्षेत्र के प्रदर्शन का परिणाम नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में आई मजबूती का नतीजा है।


सेवा क्षेत्र में 10%, मैन्युफैक्चरिंग में 9.2% की वृद्धि

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि सेवा क्षेत्र, विनिर्माण और निवेश ने भारत की अर्थव्यवस्था को नई गति दी है। पहली तिमाही में सेवा क्षेत्र में 10 प्रतिशत और विनिर्माण क्षेत्र में 9.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वहीं द्वितीयक क्षेत्र की वृद्धि दर 8.6 प्रतिशत रही।

उन्होंने कहा कि सकल स्थायी पूंजी निर्माण यानी उत्पादन क्षमता बढ़ाने वाले निवेश में 11.9 प्रतिशत की वृद्धि भविष्य में अर्थव्यवस्था के विस्तार की संभावनाओं को मजबूत करती है। निजी खपत में भी 7.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो देश में घरेलू मांग की मजबूती को दर्शाती है।

सरावगी के मुताबिक सेवा क्षेत्र के भीतर सूचना प्रौद्योगिकी, वित्तीय सेवाओं और पेशेवर सेवाओं की भी अर्थव्यवस्था की वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि भारत की आर्थिक मजबूती किसी एक क्षेत्र पर निर्भर नहीं है। देश का बड़ा घरेलू बाजार, बढ़ता निवेश, मजबूत विनिर्माण आधार और डिजिटल अर्थव्यवस्था वैश्विक आर्थिक झटकों से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।


कृषि क्षेत्र की स्थिर वृद्धि को भी बताया महत्वपूर्ण

सरावगी ने कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में 3.6 प्रतिशत की वृद्धि का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में यह वृद्धि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती और किसानों की भूमिका को दर्शाती है।

उन्होंने कहा कि भारत की आर्थिक विविधता देश को किसी एक बाजार या क्षेत्र पर अत्यधिक निर्भर होने से बचाती है। पिछले वर्षों में किए गए संरचनात्मक सुधार, बुनियादी ढांचे का विस्तार और निवेश के अनुकूल माहौल ने अर्थव्यवस्था को वैश्विक चुनौतियों के बीच मजबूती प्रदान की है।


बिहार को निवेश और रोजगार के नए अवसर मिलने का दावा

संजय सरावगी ने कहा कि भारत की तेज आर्थिक वृद्धि का असर बिहार पर भी पड़ने की संभावना है। मजबूत राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के साथ राज्य में निवेश, उद्योग, बुनियादी ढांचे और रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि सड़क, रेल, ऊर्जा, उद्योग, शिक्षा और कौशल विकास जैसे क्षेत्रों में हो रहे काम से बिहार को आर्थिक विकास की मुख्यधारा से जोड़ने में मदद मिलेगी।

उन्होंने कहा कि बिहार के युवाओं के लिए अवसरों का दायरा अब केवल नौकरी तक सीमित नहीं है। स्टार्टअप, छोटे उद्योग, डिजिटल सेवाओं और कौशल आधारित रोजगार के जरिए युवा रोजगार देने वाले उद्यमी भी बन सकते हैं। मजबूत आर्थिक गतिविधियों के साथ इन क्षेत्रों में नई संभावनाएं पैदा होने की उम्मीद है।


मिथिलांचल समेत पूरे बिहार में नई संभावनाओं की बात

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बिहार विकास की इस गति से जुड़ रहा है। सड़क, रेल, ऊर्जा, उद्योग, कौशल विकास और आधारभूत संरचना के विस्तार से राज्य में रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।

उन्होंने कहा कि मिथिलांचल समेत पूरे बिहार के युवा, किसान और छोटे-बड़े उद्यमी मजबूत होती राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था से लाभ उठा सकते हैं। किसानों के लिए बेहतर बाजार, कृषि आधारित उद्योग और ग्रामीण बुनियादी ढांचे के विस्तार से भी आय के नए अवसर पैदा होने की संभावना है।

सरावगी ने कहा कि बिहार इस विकास यात्रा का अभिन्न हिस्सा है और राष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों के बढ़ने का फायदा राज्य को भी मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्य में औद्योगिक निवेश और आधारभूत संरचना के विस्तार के साथ युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं।


RBI के अनुमान से बेहतर रही वृद्धि दर

सरावगी ने कहा कि पहली तिमाही में दर्ज 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर भारतीय रिजर्व बैंक के 7 प्रतिशत के अनुमान से भी अधिक रही है। उन्होंने इसे भारतीय अर्थव्यवस्था की अपेक्षा से बेहतर प्रदर्शन के तौर पर रेखांकित किया।

उन्होंने कहा कि 7.8 प्रतिशत की विकास दर को केवल एक आर्थिक आंकड़े के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार यह वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत की आर्थिक क्षमता और बढ़ते आत्मविश्वास को दिखाती है। भारत अब वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों का केवल दर्शक नहीं, बल्कि वैश्विक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला देश बन रहा है।

सरावगी ने कहा कि भारत की बढ़ती आर्थिक क्षमता विकसित भारत के संकल्प को गति दे रही है। उन्होंने वैश्विक परिस्थितियों के बीच भारत की विकास गति को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का परिणाम बताते हुए कहा कि संकट और अनिश्चितता के दौर में भी देश ने अपनी आर्थिक रफ्तार बनाए रखी है।

उन्होंने कहा कि 7.8 प्रतिशत की विकास दर ‘विकसित भारत’ के संकल्प की दिशा में एक मजबूत कदम है और आने वाले समय में बिहार भी इस विकास यात्रा में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।