नई दिल्ली। छात्र आंदोलन के लगातार तेज होते स्वर के बीच गुरुवार को एक नया घटनाक्रम सामने आया, जब सुप्रीम कोर्ट के वकीलों ने भी जंतर-मंतर पहुंचकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के समर्थन में आवाज बुलंद की। आंदोलन की अगुवाई कर रही कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के समर्थन में आयोजित इस प्रदर्शन में वकीलों ने "लोकतंत्र बचाओ, संविधान बचाओ" के नारे लगाए। इसके साथ ही छात्र आंदोलन अब केवल विद्यार्थियों तक सीमित न रहकर कानूनी, सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर भी व्यापक चर्चा का विषय बन गया है।
सुप्रीम कोर्ट के वकीलों ने छात्रों के समर्थन में किया प्रदर्शन
गुरुवार दोपहर करीब 3:48 बजे सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ताओं ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के समर्थन में मार्च निकाला। प्रदर्शन के दौरान उन्होंने लोकतांत्रिक अधिकारों और संविधान की रक्षा का संदेश देते हुए "लोकतंत्र बचाओ, संविधान बचाओ" अभियान चलाया। इस प्रदर्शन का वीडियो समाचार एजेंसी ANI ने भी साझा किया।
सरकार ने कहा- बातचीत के लिए हमेशा खुले हैं दरवाजे
करीब 3:20 बजे केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार आंदोलन से जुड़े सभी पक्षों से चर्चा करने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से छात्र प्रतिनिधियों को कई बार औपचारिक रूप से बातचीत का प्रस्ताव दिया जा चुका है। उनके अनुसार जेपी नड्डा के कार्यालय या आवास पर किसी भी समय बातचीत हो सकती है और संवाद के माध्यम से समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा।
निर्मला सीतारमण ने विपक्ष पर साधा निशाना
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने छात्रों के प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि परीक्षा, पेपर लीक और पुनः परीक्षा जैसे विषय युवाओं के भविष्य से जुड़े अत्यंत संवेदनशील मुद्दे हैं। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी होती तो विपक्ष की नाराजगी समझ में आती, लेकिन प्रधानमंत्री पहले ही प्रतिक्रिया दे चुके हैं और पेपर लीक के आरोपियों की गिरफ्तारी भी हो चुकी है। उन्होंने कहा कि सरकार दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के पक्ष में है।
एनएसए संबंधी खबरों का दिल्ली पुलिस ने किया खंडन
दोपहर 3:08 बजे दिल्ली पुलिस ने उन खबरों को पूरी तरह गलत बताया जिनमें दावा किया जा रहा था कि जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन के मद्देनजर दिल्ली पुलिस आयुक्त को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत अतिरिक्त शक्तियां दी गई हैं। पुलिस ने आधिकारिक बयान जारी कर इन दावों का खंडन किया।
पेपर लीक पर सरकार की बढ़ी सक्रियता
सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरन रिजिजू ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की। वहीं, एक अन्य रिपोर्ट में दावा किया गया कि सरकार सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 के तहत आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाने की तैयारी कर रही है। हालांकि इस संबंध में सरकार की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। सूत्रों के अनुसार चार राज्यों में विशेष फास्ट ट्रैक अदालतें स्थापित करने की भी तैयारी चल रही है।
अभिजीत दीपके ने प्रधानमंत्री के बयान पर किया तंज
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा युवाओं के भविष्य को सर्वोच्च प्राथमिकता बताए जाने के बाद CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की तस्वीर साझा करते हुए टिप्पणी की। उन्होंने प्रधानमंत्री के बयान के एक हिस्से का उल्लेख करते हुए व्यंग्यात्मक प्रतिक्रिया दी।
अमित शाह बोले- दोषियों को मिलेगी त्वरित सजा
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि युवाओं का उज्ज्वल भविष्य मोदी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा फास्ट ट्रैक अदालतों के गठन का निर्णय पेपर लीक मामलों में त्वरित सुनवाई और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
शिखर धवन और समय रैना की भी आई प्रतिक्रिया
पूर्व भारतीय क्रिकेटर शिखर धवन ने सोशल मीडिया पर लिखा कि युवाओं के सपनों को समझना आवश्यक है, लेकिन कठिन समय में देश की संस्थाओं और सरकार पर विश्वास बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। वहीं, कॉमेडियन समय रैना ने कहा कि छात्र केवल बेहतर शिक्षा व्यवस्था और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं तथा संवाद के माध्यम से समाधान निकाला जाना चाहिए।
अलख पांडे ने सरकार से छात्रों से बात करने की अपील की
जंतर-मंतर पहुंचे फिजिक्स वाला के संस्थापक अलख पांडे ने कहा कि यह आंदोलन केवल NEET तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी शिक्षा व्यवस्था, भर्ती परीक्षाओं और युवाओं के भविष्य से जुड़ा मुद्दा बन चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान छात्रों के साथ बल प्रयोग किया गया और सरकार से अपील की कि वह छात्रों की समस्याएं सुनने के लिए सीधे उनसे संवाद करे।
दिल्ली हाई कोर्ट में पहुंचा मामला
दिल्ली हाई कोर्ट ने उस याचिका को स्वीकार कर लिया है जिसमें जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) से जांच कराने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि इस आंदोलन से दिल्ली में व्यापक अव्यवस्था की स्थिति उत्पन्न हुई। मामले की सुनवाई शुक्रवार को प्रस्तावित है।
प्रधानमंत्री ने फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की घोषणा की
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि पेपर लीक से जुड़े सभी मामलों में दोषियों को जल्द सजा दिलाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित किए जाएंगे। उन्होंने संबंधित विभागों को आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए और कहा कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
महाराष्ट्र बंद और विभिन्न राज्यों में समर्थन
छात्र आंदोलन के समर्थन में वंचित बहुजन आघाड़ी (VBA) ने महाराष्ट्र बंद का आह्वान किया। इसके अलावा कई राजनीतिक दलों, शैक्षणिक संस्थानों और कोचिंग संगठनों ने भी आंदोलन के प्रति समर्थन व्यक्त किया। मुंबई और नागपुर सहित कई शहरों में समर्थन कार्यक्रम आयोजित किए गए।
मेट्रो स्टेशन बंद, इंटरनेट और सुरक्षा को लेकर भी उठे सवाल
दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए कई प्रमुख मेट्रो स्टेशनों को अस्थायी रूप से बंद रखा गया। वहीं, आंदोलन से जुड़े लोगों ने जंतर-मंतर क्षेत्र में इंटरनेट सेवा बाधित किए जाने का आरोप लगाया, जबकि पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अपने स्तर पर कार्रवाई जारी रखने की बात कही।
पुलिस कार्रवाई और कानून व्यवस्था पर भी रही नजर
प्रदर्शन के दौरान पथराव की घटनाओं में पुलिस अधिकारियों के घायल होने की जानकारी सामने आई। वहीं, मुंबई पुलिस ने प्रदर्शन के सिलसिले में कई प्राथमिकी दर्ज करने की पुष्टि की। महिला प्रदर्शनकारी से कथित अभद्र व्यवहार के मामले में अतिरिक्त डीसीपी संदीप लांबा को प्रदर्शन स्थल से हटाए जाने की भी जानकारी सामने आई।
