पटना। पटना जिले से होकर गुजरने वाली नदियों के जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि को देखते हुए जिला प्रशासन ने बाढ़ से निपटने की तैयारियां तेज कर दी हैं। जिलाधिकारी कुंदन कुमार ने जल संसाधन और आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारियों को 24 घंटे सतर्क रहने और तटबंधों की लगातार निगरानी करने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि किसी भी संभावित आपात स्थिति में राहत और बचाव कार्य शुरू करने में देरी नहीं होनी चाहिए। इसके लिए सभी विभागों को पहले से कार्ययोजना तैयार रखने को कहा गया है।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि फिलहाल तटबंधों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जहां भी किसी तरह की आवश्यकता महसूस हो, वहां बाढ़ से बचाव और तटबंधों की सुरक्षा के लिए तत्काल कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि आपदा के समय रिस्पॉन्स टाइम जितना कम होगा, उतना ही प्रभावी तरीके से जन-धन की सुरक्षा की जा सकेगी।
पांच प्रमंडलों में चौबीसों घंटे निगरानी
पटना जिले में जल संसाधन विभाग के पांच प्रमंडल—सोन बाढ़ सुरक्षा प्रमंडल, खगौल; गंगा सोन बाढ़ सुरक्षा प्रमंडल, दीघा; पुनपुन बाढ़ सुरक्षा प्रमंडल, अनीसाबाद; पुनपुन बाढ़ सुरक्षा प्रमंडल, पटना सिटी और बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, बख्तियारपुर—बाढ़ नियंत्रण और तटबंधों की निगरानी कर रहे हैं।
इन प्रमंडलों के अधीन गंगा, सोन, पुनपुन, दरधा, धोवा और महतमाइन समेत विभिन्न नदियां आती हैं। इन नदियों के तटबंधों पर 24 घंटे लगातार निगरानी रखी जा रही है। जिलाधिकारी ने खास तौर पर नालंदा और जहानाबाद की ओर से पटना जिले में आने वाली नदियों के जलस्तर पर भी लगातार नजर रखने का निर्देश दिया है, ताकि संभावित खतरे की स्थिति में समय रहते कार्रवाई की जा सके।
बाढ़ की दृष्टि से जिले में 31 अतिसंवेदनशील और 181 संवेदनशील स्थलों की पहचान की गई है। इन स्थानों पर बाढ़रोधी सामग्री भी उपलब्ध कराई गई है। प्रशासन के अनुसार 8 लाख 58 हजार बालू भरे ईसी बैग, 2,083 घनमीटर स्थानीय बालू, 64,093 नायलॉन क्रेट और 10,682 जियो बैग तैयार रखे गए हैं।
जिलाधिकारी ने निर्देश दिया है कि इन सामग्रियों को ऐसे स्थानों पर रखा जाए, जहां जरूरत पड़ते ही इन्हें आसानी से संबंधित जगहों तक पहुंचाया जा सके। इसके लिए ट्रैक्टर, जेनरेटर, मजदूर और अन्य जरूरी संसाधनों की व्यवस्था पहले से सुनिश्चित रखने को कहा गया है। आवश्यकता के अनुसार बाढ़रोधी सामग्री की मात्रा बढ़ाने और उसे सुरक्षित स्थानों पर रखने का भी निर्देश दिया गया है।
120 शरण स्थल चिह्नित, 219 निजी नावों से एकरारनामा
संभावित बाढ़ की स्थिति में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और ठहराने के लिए जिले में 120 शरण स्थलों को चिह्नित किया गया है। आपदा प्रबंधन विभाग ने 219 पंजीकृत निजी नावों के साथ एकरारनामा किया है। इसके अलावा अन्य निजी नाव मालिकों के निबंधन की प्रक्रिया भी चल रही है।
बचाव कार्य के लिए जिले में 5 इन्फ्लेटेबल लाइटिंग सिस्टम, 543 लाइफ जैकेट और 2 महाजाल की व्यवस्था की गई है। आपात स्थिति में एसडीआरएफ की एक कंपनी 12 बोट और 32 जवानों के साथ गायघाट, पटना सिटी में तैनात है। वहीं एनडीआरएफ की दो टीमें 8 बोट के साथ दीदारगंज बाजार समिति परिसर में तैनात रखी गई हैं।
नालों की सफाई और जलनिकासी पर भी जोर
प्रखंड, अंचल और अनुमंडल स्तर पर भी अधिकारियों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। अनुमंडल पदाधिकारियों, प्रखंड विकास पदाधिकारियों और अंचल अधिकारियों को अपने क्षेत्रों में संभावित बाढ़ की स्थिति पर नजर रखने और जरूरत पड़ने पर तत्काल कार्रवाई करने को कहा गया है।
पटना नगर निगम के अधिकारियों को नालों की नियमित सफाई कराने और जलनिकासी व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने का निर्देश दिया गया है, ताकि बारिश के दौरान जलजमाव की स्थिति न बने।
जिलाधिकारी ने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ काम करने और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने को कहा है। उन्होंने कहा कि बाढ़ जैसी आपदा में पूर्व तैयारी, समय पर सूचना और त्वरित कार्रवाई ही जन-धन की सुरक्षा का सबसे प्रभावी माध्यम है।
24 घंटे कंट्रोल रूम, प्रशासन ने जारी किए नंबर
आपदा की स्थिति में सूचना और समन्वय के लिए जिला स्तर पर 24×7 नियंत्रण कक्ष काम कर रहा है। आवश्यक सूचना के लिए 0612-2210118 और 8235449748 पर संपर्क किया जा सकता है। सभी प्रखंडों में भी प्रखंड स्तरीय नियंत्रण कक्ष स्थापित किए गए हैं।
जिलाधिकारी कुंदन कुमार ने जिले के लोगों से अपील की कि उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि सभी तटबंध सुरक्षित हैं और जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद एवं सतर्क है। प्रशासन की ओर से स्थिति की लगातार समीक्षा की जा रही है और तटबंधों की सुरक्षा तथा बाढ़ से बचाव की तैयारि
यों की 24 घंटे निगरानी जारी है।
