erere | Source: eerनई दिल्ली: जंतर-मंतर आंदोलन से चर्चा में आई कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के भीतर अब मतभेद खुलकर सामने आते दिखाई दे रहे हैं। CJP के पूर्व स्वयंसेवक मनीष ब्रह्मभट्ट ने गुरुवार को एक अलग संगठन बनाने का ऐलान किया है। उन्होंने नए संगठन का नाम कॉकरोच जनता पार्टी-डेमोक्रेटिक (CJP-D) रखा है। संगठन की घोषणा के साथ ही ब्रह्मभट्ट ने CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके और संगठन की कार्यप्रणाली को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

पुराने कार्यकर्ताओं की अनदेखी का लगाया आरोप

मनीष ब्रह्मभट्ट का आरोप है कि जंतर-मंतर आंदोलन के शुरुआती दौर में सक्रिय रहे पुराने कार्यकर्ताओं को अब संगठन में पर्याप्त महत्व नहीं दिया जा रहा है। उनका कहना है कि जिस आंदोलन की शुरुआत युवाओं और छात्रों के मुद्दों को लेकर हुई थी, वह अब एक सीमित राजनीतिक टीम के इर्द-गिर्द सिमटता जा रहा है।

ब्रह्मभट्ट ने CJP के मौजूदा स्वरूप को लेकर सवाल उठाते हुए इसे दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी (AAP) के करीब बताया है। हालांकि, उनके इन आरोपों पर अभी तक CJP या अभिजीत दिपके की ओर से कोई जवाब सामने नहीं आया है।

अगस्त में दिपके के घर के बाहर हुआ था प्रदर्शन

CJP से अलग संगठन बनाने की घोषणा से पहले भी मनीष ब्रह्मभट्ट और संगठन के बीच मतभेद सामने आ चुके थे। अगस्त में ब्रह्मभट्ट गुजरात से छत्रपति संभाजीनगर पहुंचे थे। इसी दौरान उन्हें जानकारी मिली कि CJP की मुख्य टीम की बैठक अभिजीत दिपके के घर पर आयोजित की जा रही है।

इसके बाद ब्रह्मभट्ट और उनके साथी राहुल पांड्या ने दिपके के घर के बाहर प्रदर्शन किया था। दोनों का आरोप था कि जंतर-मंतर आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले पुराने कार्यकर्ताओं को इस बैठक में शामिल नहीं किया गया।

प्रदर्शन के दौरान बिगड़ी थी दोनों की तबीयत

दिपके के घर के बाहर हुए प्रदर्शन के दौरान मनीष ब्रह्मभट्ट और राहुल पांड्या की तबीयत खराब हो गई थी। इसके बाद दोनों को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उस समय मीडिया रिपोर्टों में ब्रह्मभट्ट को CJP कार्यकर्ता के तौर पर बताया गया था।

अब ब्रह्मभट्ट ने खुद को संगठन से अलग करते हुए CJP-D नाम से नए संगठन की घोषणा कर दी है। इससे आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ताओं के बीच सामने आए मतभेदों ने एक नया राजनीतिक मोड़ ले लिया है।

CJP पर राजनीतिक झुकाव का आरोप

दिल्ली में गुरुवार को CJP-D की घोषणा करते हुए ब्रह्मभट्ट ने आरोप लगाया कि मूल आंदोलन पर ऐसे लोगों का प्रभाव बढ़ गया है, जिनके आम आदमी पार्टी से पुराने संबंध रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि CJP की टीम में शामिल आठ लोगों के अतीत में AAP से संबंध रहे हैं।

हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इसे ब्रह्मभट्ट का आरोप ही माना जा रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि CJP अब छात्रों और आम लोगों से जुड़े मुद्दों पर उतना ध्यान नहीं दे रही है, जितना आंदोलन के शुरुआती दौर में दिया जाता था।

उनके मुताबिक, संगठन का मुख्य उद्देश्य अब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का विरोध करना रह गया है। इन आरोपों के चलते CJP की विचारधारा और भविष्य की दिशा को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

राष्ट्रीय कार्यसमिति के गठन पर भी सवाल

मनीष ब्रह्मभट्ट ने CJP की राष्ट्रीय कार्यसमिति के गठन को लेकर भी आपत्ति जताई। उनका कहना है कि जंतर-मंतर के आंदोलन में देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग शामिल हुए थे। ऐसे में संगठन की राष्ट्रीय टीम में विभिन्न राज्यों के प्रदर्शनकारियों को उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए था।

ब्रह्मभट्ट का आरोप है कि राष्ट्रीय टीम में अभिजीत दिपके के करीबी लोगों को अधिक महत्व दिया गया और आंदोलन के पुराने कार्यकर्ताओं के साथ पर्याप्त चर्चा नहीं की गई।

दरअसल, अगस्त में CJP ने अपनी राष्ट्रीय कार्यसमिति का गठन किया था। इस समिति में अभिजीत दिपके को राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी दी गई थी।

अभिजीत दिपके का AAP से रहा है पुराना संबंध

अभिजीत दिपके के राजनीतिक अतीत को लेकर भी लगातार चर्चा होती रही है। वह पहले आम आदमी पार्टी से जुड़े रहे हैं। दिपके ने अपने पुराने राजनीतिक संबंधों की बात स्वीकार की है, लेकिन उनका कहना है कि अब उनका आम आदमी पार्टी से कोई संबंध नहीं है।

जंतर-मंतर पर CJP के आंदोलन के दौरान अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी के कुछ नेता भी अभिजीत दिपके के साथ दिखाई दिए थे। इसके अलावा CJP के कुछ सदस्यों के पुराने राजनीतिक संबंधों को लेकर भी समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं।

प्रदर्शन में साथ दिखना राजनीतिक नियंत्रण का सबूत नहीं

हालांकि, किसी राजनीतिक नेता का किसी प्रदर्शन में शामिल होना या किसी संगठन के सदस्य का पहले किसी राजनीतिक दल से जुड़ा होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि संबंधित संगठन किसी राजनीतिक पार्टी के निर्देश पर काम कर रहा है।

इसी वजह से CJP और आम आदमी पार्टी के बीच किसी मौजूदा प्रत्यक्ष राजनीतिक नियंत्रण का दावा इस आधार पर निश्चित रूप से नहीं किया जा सकता। ब्रह्मभट्ट ने जो आरोप लगाए हैं, उनका स्वतंत्र सत्यापन भी सामने नहीं आया है।

CJP-D के ऐलान से बढ़ी हलचल

मनीष ब्रह्मभट्ट के अलग संगठन बनाने के फैसले से जंतर-मंतर आंदोलन से जुड़े समूहों के भीतर चल रही खींचतान अब सार्वजनिक हो गई है। एक तरफ ब्रह्मभट्ट पुराने कार्यकर्ताओं की भागीदारी और आंदोलन के मूल मुद्दों को लेकर सवाल उठा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर CJP की मौजूदा राष्ट्रीय संरचना अभिजीत दिपके के नेतृत्व में आगे बढ़ रही है।

CJP-D के गठन के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आंदोलन से जुड़े पुराने कार्यकर्ताओं में से कितने लोग ब्रह्मभट्ट के नए संगठन के साथ आते हैं और CJP की मौजूदा टीम इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देती है।

फिलहाल, ब्रह्मभट्ट के आरोपों पर CJP या अभिजीत दिपके की ओर से कोई आधिकारिक जवाब सामने नहीं आया है। ऐसे में दोनों पक्षों की आगे की प्रतिक्रिया इस पूरे विवाद की दिशा तय करने में अहम हो सकती है।