
नई दिल्ली। भारत के विदेशी मुद्रा भंडार को और अधिक मजबूत बनाने के उद्देश्य से भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा शुरू की गई विदेशी मुद्रा अनिवासी (एफसीएनआर) जमा योजना को लेकर सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं। वित्तीय विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस पहल के माध्यम से अनिवासी भारतीय (एनआरआई) भारत में 70 से 80 अरब डॉलर तक की विदेशी मुद्रा ला सकते हैं। आरबीआई द्वारा बैंकों को सीमित अवधि के लिए एफसीएनआर जमा पर अधिक ब्याज दर देने की अनुमति मिलने के बाद इस योजना में प्रवासी भारतीयों की रुचि तेजी से बढ़ रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बड़ी संख्या में एनआरआई इस योजना के तहत निवेश करते हैं तो इससे न केवल देश का विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत होगा, बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था को भी वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच अतिरिक्त मजबूती मिलेगी। वर्तमान अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और पश्चिम एशिया में जारी तनाव को देखते हुए विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत बनाए रखना भारत की आर्थिक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
क्या है एफसीएनआर जमा योजना?
एफसीएनआर अर्थात फॉरेन करेंसी नॉन-रेजिडेंट (Foreign Currency Non-Resident) जमा योजना विशेष रूप से अनिवासी भारतीयों और भारतीय मूल के व्यक्तियों (पीआईओ) के लिए बनाई गई है। इस योजना के तहत वे अपनी विदेशी मुद्रा को भारतीय बैंकों में सावधि जमा के रूप में निवेश कर सकते हैं। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि जमा की गई राशि भारतीय रुपये में परिवर्तित नहीं होती, बल्कि उसी विदेशी मुद्रा में सुरक्षित रहती है जिसमें निवेश किया गया है।
इस व्यवस्था से निवेशकों को विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव का जोखिम नहीं उठाना पड़ता। यदि भारतीय रुपये की कीमत में बदलाव भी होता है, तब भी निवेशक की मूल राशि विदेशी मुद्रा में सुरक्षित रहती है। यही कारण है कि एफसीएनआर योजना को सुरक्षित और आकर्षक निवेश विकल्प माना जाता है।
30 सितंबर 2026 तक उपलब्ध है विशेष अवसर
सिंगापुर के चार्टर्ड अकाउंटेंट एवं भारतीय सनदी लेखाकार संस्थान (आईसीएआई) की सिंगापुर शाखा के अध्यक्ष संजय गट्टानी ने जानकारी दी कि आरबीआई की यह विशेष पहल 30 सितंबर 2026 तक प्रभावी रहेगी। इस अवधि में भारतीय बैंक एफसीएनआर जमा पर सामान्य से अधिक ब्याज दर की पेशकश कर रहे हैं ताकि अधिक से अधिक प्रवासी भारतीय इस योजना का लाभ उठा सकें।
उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत अब तक लगभग 10 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा भारत में आ चुकी है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि निर्धारित अवधि तक यह आंकड़ा बढ़कर 70 से 80 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है, जो भारत के विदेशी मुद्रा भंडार को नई मजबूती प्रदान करेगा।
वैश्विक वेबिनार में हुई विस्तृत चर्चा
एफसीएनआर योजना को लेकर भारतीय सनदी लेखाकार संस्थान (आईसीएआई) की सिंगापुर शाखा द्वारा 15 जुलाई को एक वैश्विक वेबिनार का आयोजन किया गया। इस वेबिनार में दुनिया के विभिन्न देशों से करीब 1,800 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इनमें चार्टर्ड अकाउंटेंट, निवेशक, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, वित्तीय सलाहकार और बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ शामिल थे।
वेबिनार का उद्देश्य प्रवासी भारतीयों को एफसीएनआर योजना की उपयोगिता, निवेश प्रक्रिया, ब्याज दरों, कराधान और नियामकीय प्रावधानों की विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराना था, ताकि वे निवेश से पहले सभी पहलुओं को अच्छी तरह समझ सकें।
देश के विकास में भी मिलेगा योगदान का अवसर
संजय गट्टानी ने कहा कि एफसीएनआर योजना केवल निवेश का माध्यम नहीं है, बल्कि यह प्रवासी भारतीयों को भारत के आर्थिक विकास में प्रत्यक्ष योगदान देने का अवसर भी प्रदान करती है। उनके अनुसार यदि बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा भारत आती है तो इससे देश की बाहरी वित्तीय स्थिति मजबूत होगी, विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ेगा और रुपये की स्थिरता बनाए रखने में भी मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों में इस प्रकार का निवेश भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हो सकता है और आने वाले समय में इससे देश की वित्तीय क्षमता और मजबूत होगी।
बैंकों ने दी निवेश प्रक्रिया की जानकारी
वेबिनार में एचडीएफसी बैंक, एचएसबीसी और भारतीय स्टेट बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी भाग लिया। उन्होंने एफसीएनआर खाते खोलने की प्रक्रिया, उपलब्ध विदेशी मुद्राओं, निवेश अवधि, ब्याज दरों, नियामकीय आवश्यकताओं और कर संबंधी नियमों की विस्तृत जानकारी दी।
विशेषज्ञों ने बताया कि निवेशकों को योजना से जुड़ी सभी आवश्यक जानकारियां उपलब्ध कराई गईं तथा उनके प्रश्नों का समाधान भी किया गया। इससे एनआरआई निवेशकों को निवेश संबंधी व्यावहारिक पहलुओं को समझने में काफी सुविधा मिली।
भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण पहल
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यदि एफसीएनआर योजना के माध्यम से अनुमानित 70 से 80 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा भारत आती है तो इससे देश के विदेशी मुद्रा भंडार में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इसके साथ ही वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिरता और निवेशकों का विश्वास भी मजबूत होगा। यही कारण है कि आरबीआई और भारतीय बैंक इस योजना को सफल बनाने के लिए प्रवासी भारतीयों के बीच व्यापक स्तर पर जागरूकता बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं।
