लखनऊ। आमतौर पर 71 वर्ष की उम्र में लोग अपने जीवन के अनुभवों के साथ शांत जीवन बिताना पसंद करते हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश के रहने वाले अशोक बहार ने इस सोच को चुनौती दी है। उन्होंने एक बार फिर डॉक्टर बनने के अपने सपने को साकार करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। यह सपना केवल उनका नहीं, बल्कि उनकी मां सावित्री देवी की वर्षों पुरानी इच्छा भी है, जिसे पूरा करने के लिए वह आज भी संघर्ष कर रहे हैं।
NEET UG 2026 परीक्षा में शामिल होने के बाद अब अशोक बहार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ का दरवाजा खटखटाया है। उनकी याचिका पर 21 जुलाई 2026 को सुनवाई निर्धारित है।
52 साल पुराना सपना आज भी है जिंदा
लखनऊ के चंदरनगर निवासी अशोक बहार का कहना है कि डॉक्टर बनने की इच्छा उनके भीतर करीब 52 वर्ष पहले उनकी मां ने जगाई थी। वर्ष 1990 में उनकी मां सावित्री देवी का निधन हो गया, लेकिन उनका सपना आज भी अशोक के लिए प्रेरणा बना हुआ है। इसी संकल्प के साथ उन्होंने उम्र की परवाह किए बिना मेडिकल शिक्षा की राह दोबारा चुनी।
शानदार शैक्षणिक और पेशेवर सफर
अशोक बहार का शैक्षणिक और पेशेवर जीवन काफी प्रभावशाली रहा है। उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से बॉटनी, जूलॉजी और केमिस्ट्री विषयों में बीएससी की डिग्री प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने विधि (लॉ) की पढ़ाई की और कंप्यूटर साइंस में एमबीए भी किया।
उन्होंने इंडियन ड्रग्स एंड फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड (IDPL) में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के मार्केटिंग हेड के रूप में भी कार्य किया। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार वर्तमान में वह हाईकोर्ट में अधिवक्ता के रूप में प्रैक्टिस कर रहे हैं।
परिवार में 20 से अधिक डॉक्टर, पत्नी भी हैं चिकित्सक
अशोक बहार के परिवार में 20 से अधिक डॉक्टर हैं, जिनमें कई विदेशों में चिकित्सा सेवा दे रहे हैं। उनकी पत्नी डॉ. मंजुल बहार भी चिकित्सक हैं और वर्तमान में अमेरिका में कार्यरत हैं।
अशोक का कहना है कि उन्हें दवाओं और चिकित्सा क्षेत्र की अच्छी समझ है, लेकिन डॉक्टर के रूप में मरीजों की सेवा करने के लिए एमबीबीएस की डिग्री आवश्यक है। इसी उद्देश्य से उन्होंने NEET परीक्षा देने का निर्णय लिया।
1974 में पहली बार दी थी मेडिकल प्रवेश परीक्षा
डॉक्टर बनने की उनकी यात्रा नई नहीं है। उन्होंने पहली बार वर्ष 1974 में मेडिकल प्रवेश परीक्षा दी थी, लेकिन उस समय सफलता नहीं मिली।
बाद में पारिवारिक और पेशेवर जिम्मेदारियों के कारण यह सपना अधूरा रह गया। हालांकि सुप्रीम कोर्ट द्वारा NEET परीक्षा में अधिकतम आयु सीमा हटाए जाने के बाद उन्होंने दोबारा प्रयास शुरू किया। उन्होंने वर्ष 2023 में भी NEET परीक्षा दी और अब NEET UG 2026 में भी शामिल हुए।
हाईकोर्ट में उठाया वरिष्ठ नागरिकों के आरक्षण का मुद्दा
NEET UG 2026 परीक्षा के बाद अशोक बहार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में रिट याचिका दाखिल की है। उन्होंने अदालत से सवाल किया है कि एमबीबीएस प्रवेश में वरिष्ठ नागरिकों के लिए कोई आरक्षण या विशेष प्रावधान क्यों नहीं है।
याचिका में उन्होंने योग्य वरिष्ठ नागरिकों के लिए एमबीबीएस प्रवेश प्रक्रिया में एक प्रतिशत आरक्षण देने की मांग की है। उनका तर्क है कि शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार उम्र के साथ समाप्त नहीं होना चाहिए और यदि कोई व्यक्ति योग्य है तो उसे अवसर मिलना चाहिए।
21 जुलाई को होगी महत्वपूर्ण सुनवाई
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ इस याचिका पर 21 जुलाई 2026 को सुनवाई करेगी। इस मामले पर आने वाला निर्णय वरिष्ठ नागरिकों के लिए उच्च शिक्षा और पेशेवर पाठ्यक्रमों में अवसरों को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
