नई दिल्ली। देश में हाई-स्पीड रेल यात्रा को लेकर एक बड़ी योजना सामने आई है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि प्रस्तावित बुलेट ट्रेन परियोजना को उत्तर प्रदेश और बिहार तक ले जाने की तैयारी की जा रही है। यदि योजना आगे बढ़ती है तो दिल्ली से लखनऊ और पटना के बीच यात्रा का समय मौजूदा परिवहन साधनों की तुलना में काफी कम हो सकता है। रेल मंत्री के मुताबिक, प्रस्तावित व्यवस्था में दिल्ली से लखनऊ की यात्रा करीब दो घंटे और दिल्ली से पटना की यात्रा लगभग साढ़े चार घंटे में पूरी हो सकेगी। वहीं दिल्ली से वाराणसी पहुंचने में करीब तीन घंटे 33 मिनट लगने का अनुमान बताया गया है।
बिहार और उत्तर प्रदेश तक पहुंचाने की तैयारी
अश्विनी वैष्णव ने सोमवार को कहा कि प्रस्तावित बुलेट ट्रेन परियोजना को उत्तर प्रदेश और बिहार तक ले जाने की तैयारी पर काम चल रहा है। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि दोनों राज्यों तक बुलेट ट्रेन सेवा कब तक शुरू हो सकेगी। इसका मतलब है कि फिलहाल इस विस्तार को लेकर योजना और तैयारी का काम आगे बढ़ाया जा रहा है, जबकि संचालन की निश्चित समयसीमा अभी सामने नहीं आई है।
यह घोषणा ऐसे समय में सामने आई है जब उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले केंद्र सरकार की ओर से राज्य से जुड़े कई बड़े मुद्दों पर चर्चा हो रही है। बुलेट ट्रेन जैसी हाई-स्पीड परिवहन सुविधा उत्तर प्रदेश और बिहार के यात्रियों के लिए लंबी दूरी की यात्रा को तेज करने की दिशा में महत्वपूर्ण योजना बन सकती है।
दिल्ली-लखनऊ और दिल्ली-पटना यात्रा में बड़ा बदलाव
प्रस्तावित योजना की सबसे खास बात यात्रा के समय को लेकर है। रेल मंत्री के अनुसार, दिल्ली से लखनऊ के बीच की यात्रा करीब दो घंटे में पूरी हो सकेगी। इसी तरह दिल्ली से पटना तक पहुंचने में करीब साढ़े चार घंटे लगने की बात कही गई है।
दिल्ली से वाराणसी की यात्रा भी हाई-स्पीड रेल के जरिए करीब तीन घंटे 33 मिनट में पूरी करने की योजना बताई गई है। इन समय-सीमाओं के चलते राष्ट्रीय राजधानी को उत्तर प्रदेश और बिहार के प्रमुख शहरों से तेज रेल संपर्क मिलने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, इन प्रस्तावित सेवाओं के शुरू होने की अंतिम तारीख अभी घोषित नहीं की गई है।
देश की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना का काम भी जारी
भारत की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर है। इस परियोजना के तहत मुंबई और अहमदाबाद के बीच 508 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर का निर्माण किया जा रहा है। मौजूदा योजना के अनुसार, परियोजना के शुरुआती चरण में गुजरात के सूरत और बिलिमोरा के बीच करीब 50 किलोमीटर लंबे रेल खंड पर अगले वर्ष 15 अगस्त तक ट्रेन परिचालन शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।
सूरत-बिलिमोरा के बीच तैयार किए जा रहे इस हिस्से को परियोजना के शुरुआती परिचालन और परीक्षण के लिहाज से महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है। इसी हिस्से पर शुरुआती ट्रायल और संचालन शुरू करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
1.08 लाख करोड़ रुपये की परियोजना
मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना की कुल लागत 1 लाख 8 हजार करोड़ रुपये बताई गई है। इसमें जापान की ओर से 88 हजार करोड़ रुपये का योगदान किया जाना है। महाराष्ट्र और गुजरात सरकार 5-5 हजार करोड़ रुपये देंगी, जबकि भारत सरकार की ओर से 10 हजार करोड़ रुपये का योगदान होगा।
इस परियोजना में जापान की तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। भारत और जापान के सहयोग से विकसित हो रही यह हाई-स्पीड रेल परियोजना देश में तेज गति वाली रेल व्यवस्था की शुरुआत के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
320 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार
जापानी तकनीक पर आधारित बुलेट ट्रेन की डिजाइन गति 350 किलोमीटर प्रति घंटा बताई गई है, जबकि इसकी परिचालन गति 320 किलोमीटर प्रति घंटा रखी गई है। इतनी अधिक गति के कारण इस रेल सेवा का उद्देश्य लंबी दूरी की यात्रा के समय को काफी कम करना है।
मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर पर कुल 12 स्टेशन बनाए जा रहे हैं। इनमें चार स्टेशन महाराष्ट्र में और आठ स्टेशन गुजरात में होंगे। स्टेशन ऐसे क्षेत्रों में बनाए जा रहे हैं, जिन्हें प्रमुख औद्योगिक और व्यावसायिक केंद्रों से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया गया है।
महाराष्ट्र में चार और गुजरात में आठ स्टेशन
महाराष्ट्र में बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC), ठाणे, विरार और बोइसर स्टेशन बनाए जा रहे हैं। वहीं गुजरात में वापी, बिलिमोरा, सूरत, भरूच, वडोदरा, आनंद, अहमदाबाद और साबरमती स्टेशन होंगे।
इन स्टेशनों के माध्यम से हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर को प्रमुख शहरों और आर्थिक गतिविधियों वाले क्षेत्रों से जोड़ने की योजना है। इससे बुलेट ट्रेन सेवा का उपयोग करने वाले यात्रियों को विभिन्न महत्वपूर्ण स्थानों तक पहुंचने में सुविधा मिलने की उम्मीद है।
समुद्र के नीचे बनेगी करीब 7 किलोमीटर लंबी सुरंग
मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना की सबसे खास तकनीकी विशेषताओं में समुद्र के नीचे बनने वाली रेल सुरंग भी शामिल है। मुंबई के पास करीब सात किलोमीटर लंबी यह सुरंग समुद्र के नीचे से गुजरेगी।
यह भारत की पहली ऐसी रेल सुरंग होगी, जिसमें हाई-स्पीड रेल संचालन के लिए अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। परियोजना का बड़ा हिस्सा एलिवेटेड बनाया जा रहा है, जबकि मुंबई क्षेत्र में समुद्र के नीचे सुरंग निर्माण को विशेष महत्व दिया गया है।
BKC स्टेशन पर छह प्लेटफॉर्म, लागत 3,680 करोड़ रुपये
मुंबई के बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स स्टेशन को भी हाई-स्पीड रेल परियोजना का अहम हिस्सा बनाया जा रहा है। यहां छह प्लेटफॉर्म बनाए जाएंगे। स्टेशन को नजदीकी मेट्रो रेल सेवा से जोड़ने की योजना है और इसके लिए राज्य सरकार के साथ बातचीत अंतिम चरण में होने की बात कही गई है।
BKC स्टेशन की अनुमानित लागत 3,680 करोड़ रुपये बताई गई है। इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि भविष्य में यहां 30 मंजिला इमारत बनाई जा सके। स्टेशन के लिए जमीन की खुदाई का 98 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है और निर्माण कार्य कंक्रीट चरण तक पहुंच गया है।
बिहार और यूपी के यात्रियों के लिए उम्मीद
बुलेट ट्रेन परियोजना को उत्तर प्रदेश और बिहार तक ले जाने की योजना की घोषणा के बाद इन राज्यों के यात्रियों के लिए तेज रेल संपर्क की उम्मीद बढ़ी है। खासकर दिल्ली से लखनऊ, वाराणसी और पटना जैसे प्रमुख शहरों के बीच यात्रा समय कम करने की योजना इस प्रस्ताव को महत्वपूर्ण बनाती है।
हालांकि, रेल मंत्री ने अभी इस विस्तार की शुरुआत की निश्चित तारीख नहीं बताई है। इसलिए फिलहाल दिल्ली-उत्तर प्रदेश-बिहार बुलेट ट्रेन कनेक्टिविटी को प्रस्तावित योजना के तौर पर ही देखा जा रहा है। दूसरी ओर, मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना पर निर्माण और शुरुआती परिचालन की तैयारी जारी है।
