नई दिल्ली। भारतीय सेना में मेजर रैंक के एक अधिकारी की पत्नी पर विदेशी खुफिया नेटवर्क के संपर्क में रहकर संवेदनशील सूचनाएं साझा करने का संदेह जताया गया है। जम्मू-कश्मीर में सामने आए इस मामले में पुलिस, सेना और केंद्रीय खुफिया एजेंसियां संयुक्त रूप से जांच कर रही हैं। शुरुआती पूछताछ में महिला के संयुक्त राष्ट्र में इंटर्नशिप के दौरान विदेशी नागरिकों के संपर्क में आने और बाद में एक संदिग्ध मलेशियाई कंसल्टेंट से जुड़ने की जानकारी सामने आने का दावा किया गया है। हालांकि, जासूसी के आरोपों की अभी जांच चल रही है और महिला के दोषी होने की पुष्टि नहीं हुई है।
शादी से पहले ही विदेशी संपर्कों में आने का संदेह
जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, तेलंगाना की रहने वाली महिला ने वर्ष 2021 में बेंगलुरु विश्वविद्यालय से मास्टर डिग्री हासिल की थी। इसके बाद वह संयुक्त राष्ट्र में इंटर्नशिप और रिसर्च से जुड़े कार्यों के लिए गई। बताया गया है कि जिनेवा में इंटरनेशनल गवर्नेंस से संबंधित एक वर्षीय कोर्स पूरा करने के बाद वह भारत लौटी और वर्ष 2023 में सेना के मेजर रैंक के अधिकारी से उसकी शादी हुई। जांच एजेंसियों को संदेह है कि संयुक्त राष्ट्र में इंटर्नशिप के दौरान ही महिला कई विदेशी नागरिकों के संपर्क में आई थी। इनमें एक चीनी नागरिक भी शामिल बताया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, सेना अधिकारी से विवाह होने के बाद भी महिला का उस व्यक्ति से संपर्क बने रहने की आशंका है। अब एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि ये संपर्क किस उद्देश्य से बनाए गए थे और उनके जरिए किस तरह की जानकारी साझा की गई।
मलेशियाई कंसल्टेंट के जरिए संपर्क बढ़ाने का आरोप
जांच में वर्ष 2024 के दौरान सोशल मीडिया के माध्यम से एक मलेशियाई कंसल्टेंट के संपर्क में आने की बात भी सामने आई है। अधिकारियों को संदेह है कि यह व्यक्ति कथित तौर पर चीनी खुफिया एजेंसियों के लिए काम करता था और उसने शैक्षणिक तथा शोध संबंधी विषयों के बहाने महिला से संपर्क बढ़ाया। जांचकर्ताओं के अनुसार, शुरुआत में पर्यावरण और भू-राजनीतिक मुद्दों पर लेख तैयार करने के लिए कहा गया। इसके बाद कथित तौर पर रक्षा और सुरक्षा से जुड़े विषयों पर सामग्री तैयार करने की मांग की गई। एजेंसियां यह जांच रही हैं कि इन दस्तावेजों में किस तरह की जानकारी थी और क्या उनमें कोई ऐसी सामग्री शामिल थी, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील हो सकती है।
AI की मदद से तैयार दस्तावेज और एन्क्रिप्टेड बातचीत भी जांच के घेरे में
पूछताछ के दौरान महिला के मोबाइल फोन और उससे संबंधित डिजिटल सामग्री की जांच की जा रही है। जांच एजेंसियों को कथित तौर पर कुछ ऐसे दस्तावेज मिले हैं, जिनमें सुरक्षा से जुड़े विषयों की सामग्री मौजूद होने की बात कही गई है। महिला का पक्ष बताया गया है कि सामग्री कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) टूल्स और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध स्रोतों की मदद से तैयार की गई थी। वहीं, जांचकर्ताओं को संदेह है कि कुछ सामग्री एन्क्रिप्टेड माध्यमों से साझा की गई हो सकती है। अब डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक जांच के जरिए बातचीत, दस्तावेजों के स्रोत और उनके संभावित प्राप्तकर्ताओं का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।
'बौद्धिक जाल' के जरिए जानकारी जुटाने की आशंका
जांच एजेंसियां इस संभावना की भी पड़ताल कर रही हैं कि महिला को सीधे जासूसी के लिए संपर्क करने के बजाय शोध, लेखन और अकादमिक चर्चाओं के माध्यम से धीरे-धीरे इस नेटवर्क के करीब लाया गया हो। शुरुआती स्तर पर पर्यावरण और भू-राजनीति जैसे विषयों से शुरुआत कर बाद में रक्षा संबंधी मुद्दों पर सामग्री तैयार कराने का संदेह जताया गया है। हालांकि, यह अभी जांच का हिस्सा है कि महिला को कथित गतिविधियों की वास्तविक प्रकृति की जानकारी थी या नहीं। अधिकारियों को यह भी पता लगाना है कि तैयार की गई सामग्री वास्तव में विदेशी संपर्कों तक पहुंचाई गई थी या नहीं और यदि ऐसा हुआ, तो उसमें कौन-कौन सी जानकारियां शामिल थीं।
14 अक्टूबर को जम्मू रेलवे स्टेशन पर पकड़े जाने की जानकारी
रिपोर्ट के अनुसार, 14 अक्टूबर को सुरक्षा एजेंसियों की संयुक्त टीम ने महिला को जम्मू रेलवे स्टेशन से उस समय पूछताछ के लिए अपने साथ लिया, जब वह पठानकोट जाने वाली ट्रेन पकड़ने की तैयारी में थी। इसके बाद उसे पास के मिलिट्री स्टेशन ले जाया गया, जहां उससे पूछताछ की गई। महिला के खिलाफ जम्मू के गांधी नगर थाने में मामला दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है। प्रकरण में आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम (Official Secrets Act), आपराधिक साजिश और राष्ट्रीय संप्रभुता से जुड़े भारतीय न्याय संहिता के प्रावधानों के तहत जांच की बात कही गई है। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, पूछताछ के समय तक उसकी औपचारिक गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई थी।
पैसों के लेनदेन और विदेशी नेटवर्क की भूमिका की पड़ताल
जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि कथित तौर पर संवेदनशील सामग्री जुटाने या साझा करने के बदले कोई भुगतान किया गया था या नहीं। इसके लिए डिजिटल उपकरणों, बैंकिंग लेनदेन और अन्य संभावित इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच की जा रही है। फिलहाल मामले में सबसे अहम सवाल यही हैं कि विदेशी संपर्कों का वास्तविक उद्देश्य क्या था, तैयार दस्तावेजों में कितनी संवेदनशील जानकारी थी और क्या कोई सामग्री राष्ट्रीय सुरक्षा को प्रभावित कर सकती थी। जांच पूरी होने और आधिकारिक निष्कर्ष सामने आने के बाद ही पूरे प्रकरण की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
