
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की तस्वीर।Source : Chrome
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में हैं। उनके इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच उनका नाम लगातार चर्चा में बना हुआ है। हालांकि, छात्र राजनीति से राष्ट्रीय राजनीति तक का उनका सफर कई महत्वपूर्ण पड़ावों से होकर गुजरा है। एबीवीपी के कार्यकर्ता के रूप में शुरुआत करने वाले धर्मेंद्र प्रधान आज केंद्र सरकार के प्रमुख चेहरों में गिने जाते हैं। आइए जानते हैं उनके राजनीतिक जीवन की प्रमुख उपलब्धियों और सफर की कहानी।
छात्र राजनीति से रखी सार्वजनिक जीवन की नींव
धर्मेंद्र प्रधान ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत वर्ष 1983 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से की। ओडिशा के तालचेर कॉलेज में पढ़ाई के दौरान वे छात्र राजनीति में सक्रिय हुए और छात्रसंघ अध्यक्ष चुने गए। संगठन में लगातार सक्रियता के चलते उन्हें आगे चलकर एबीवीपी का राष्ट्रीय सचिव बनने का अवसर भी मिला। यही दौर उनके नेतृत्व और संगठनात्मक कौशल की पहचान बना।
परिवार की राजनीतिक
विरासत, लेकिन बनाई अपनी अलग पहचान
धर्मेंद्र प्रधान का संबंध एक राजनीतिक परिवार से रहा है। उनके पिता देवेंद्र प्रधान भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता रहे और अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में केंद्रीय राज्य मंत्री भी रहे। इसके बावजूद धर्मेंद्र प्रधान ने संगठन और चुनावी राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई। वर्ष 2000 में उन्होंने ओडिशा के पल्लाहारा विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीतकर पहली बार विधायक बने। इसके बाद 2004 में देवगढ़ लोकसभा सीट से संसद पहुंचे और बाद में राज्यसभा के सदस्य भी बने।
भाजपा संगठन में बढ़ा कद, युवा मोर्चा की मिली कमान
संगठन में उनकी सक्रिय भूमिका को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया। इस जिम्मेदारी के दौरान उन्होंने कई राज्यों में संगठन विस्तार और युवा कार्यकर्ताओं को जोड़ने का काम किया। यही अनुभव उन्हें राष्ट्रीय राजनीति में मजबूत पहचान दिलाने में मददगार साबित हुआ।
मोदी सरकार में मिली अहम जिम्मेदारियां
2014 में केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार बनने के बाद धर्मेंद्र प्रधान को पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना जैसे प्रमुख कार्यक्रमों के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बाद में उन्हें कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय और इस्पात मंत्रालय की जिम्मेदारी भी दी गई।
शिक्षा मंत्रालय की कमान और नई शिक्षा नीति
जुलाई 2021 में धर्मेंद्र प्रधान को देश का केंद्रीय शिक्षा मंत्री बनाया गया। इस पद पर रहते हुए उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के क्रियान्वयन, उच्च शिक्षा में सुधार और नई शैक्षणिक योजनाओं को आगे बढ़ाने पर काम किया। वर्ष 2024 में एनडीए सरकार के दोबारा सत्ता में आने के बाद भी उन्हें शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई और वे लगातार इस विभाग का नेतृत्व कर रहे हैं।
राजनीतिक विवादों के बीच फिर चर्चा में
हाल के दिनों में शिक्षा से जुड़े मुद्दों और विरोध प्रदर्शनों के कारण धर्मेंद्र प्रधान एक बार फिर सुर्खियों में हैं। उनके इस्तीफे की मांग को लेकर राजनीतिक बयानबाजी जारी है। इसके बावजूद वे केंद्र सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों में शामिल हैं और शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं। उनका राजनीतिक सफर छात्र संगठन से शुरू होकर देश के शिक्षा मंत्री बनने तक पहुंचा है, जो उन्हें भाजपा के प्रमुख नेताओं में शामिल करता है।
