erer | Source: erereबीजिंग। चीन के शिनजियांग क्षेत्र के बेहद सुनसान और दुर्गम इलाके में तेजी से हो रहा एक बड़ा निर्माण अब पूरी दुनिया का ध्यान खींच रहा है। उपग्रह से ली गई तस्वीरों में एक ऐसे विमान परीक्षण केंद्र का विस्तार दिखाई दे रहा है, जिसकी तुलना अमेरिका के कुख्यात ‘एरिया 51’ से की जा रही है। यहां नए विशाल हैंगर, टैक्सीवे, विमान खड़े करने के लिए विस्तृत क्षेत्र और अन्य आधारभूत ढांचे तैयार किए जा रहे हैं। इन गतिविधियों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर चीन इस दूरदराज इलाके में किस तरह के अत्याधुनिक विमानों की तैयारी कर रहा है।

लोपनुर के पास क्यों हो रहा है इतना बड़ा निर्माण?

यह परीक्षण केंद्र शिनजियांग के लोपनुर क्षेत्र में स्थित है। इसी व्यापक क्षेत्र में चीन का प्रमुख परमाणु परीक्षण परिसर भी रहा है। वर्ष 1964 में चीन ने यहीं अपना पहला परमाणु परीक्षण किया था। अत्यंत कम आबादी, विशाल रेगिस्तानी क्षेत्र और सीमित सार्वजनिक पहुंच के कारण यह इलाका संवेदनशील सैन्य तथा तकनीकी परीक्षणों के लिए रणनीतिक रूप से बेहद उपयोगी माना जाता है। अब इसी क्षेत्र में स्थित उड़ान परीक्षण केंद्र का लगातार विस्तार विशेषज्ञों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।

उपग्रह तस्वीरों ने खोला निर्माण का राज

हाल की उपग्रह तस्वीरों में इस केंद्र पर निर्माण का पैमाना पहले की तुलना में काफी बड़ा दिखाई देता है। रिपोर्टों के अनुसार, अगस्त 2026 में ली गई तस्वीरों में नए निर्माण कार्य, बड़े हैंगर और विमानों की आवाजाही के लिए तैयार किए जा रहे मार्ग स्पष्ट दिखाई देते हैं। इससे संकेत मिलता है कि यह स्थान अब केवल सीमित परीक्षण गतिविधियों तक सिमटा हुआ केंद्र नहीं रह गया है, बल्कि इसे एक बड़े और अधिक सक्षम उड़ान परीक्षण परिसर में बदला जा रहा है।

पहले छोटा था केंद्र, अब लगातार बढ़ रहा दायरा

कुछ वर्ष पहले तक इस सुविधा में अपेक्षाकृत छोटा रनवे, सीमित हैंगर और कुछ अन्य बुनियादी ढांचे ही दिखाई देते थे। वर्ष 2023 के आसपास मुख्य एप्रन के विस्तार के साथ बदलाव तेज हुआ। इसके बाद नए बड़े हैंगर बनाए गए और 2025 में भी परिसर के कई हिस्सों में निर्माण जारी रहा। इसी अवधि में अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों से जुड़े परीक्षणों की गतिविधियां भी सामने आने लगीं।

छठी पीढ़ी के विमानों से जुड़ी गतिविधियों ने बढ़ाया रहस्य

इस केंद्र की चर्चा उस समय और बढ़ गई जब यहां चीन के संभावित छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान कार्यक्रम से जुड़े विमानों को देखे जाने की खबरें सामने आईं। रिपोर्टों में चीन के जे-36 और जे-एक्सडीएस जैसे अत्याधुनिक विमानों का उल्लेख किया गया है। इन विमानों को लेकर अभी भी कई जानकारियां सार्वजनिक नहीं हैं, लेकिन इनकी परीक्षण गतिविधियों ने इस केंद्र के महत्व को और बढ़ा दिया है।

तीन विशाल हैंगरों ने खड़े किए बड़े सवाल

दक्षिणी हिस्से में एक साथ तैयार किए जा रहे कई बड़े हैंगर इस पूरे निर्माण का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माने जा रहे हैं। उपलब्ध उपग्रह तस्वीरों के विश्लेषण के अनुसार, इनमें से कुछ हैंगर लगभग 80 मीटर लंबे और 40 मीटर चौड़े हैं। इतना बड़ा आकार केवल सामान्य लड़ाकू विमानों तक सीमित नहीं माना जा रहा। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इनका उपयोग बड़े आकार के परीक्षण विमानों, रणनीतिक विमान या भविष्य की नई पीढ़ी की विमान प्रणालियों के लिए किया जा सकता है।

क्या यहां चीन के बड़े बमवर्षक का परीक्षण होगा?

इन्हीं गतिविधियों के बीच चीन के बहुचर्चित एच-20 स्टील्थ बमवर्षक को लेकर भी अटकलें तेज हैं। हालांकि अभी तक इन नए हैंगरों को सीधे एच-20 से जोड़ने वाला सार्वजनिक रूप से पुष्ट प्रमाण सामने नहीं आया है। फिर भी बड़े हैंगर, विस्तृत एप्रन और बढ़ती परीक्षण सुविधाएं यह संकेत देती हैं कि यहां भविष्य में बड़े आकार के अत्याधुनिक विमानों की गतिविधियां संभव हैं।

नए टैक्सीवे से बढ़ेगी विमानों की आवाजाही

निर्माण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रनवे के समानांतर तैयार किया जा रहा नया टैक्सीवे है। इसके पूरा होने के बाद विमान रनवे का अनावश्यक इस्तेमाल किए बिना परीक्षण परिसर के अलग-अलग हिस्सों के बीच अधिक आसानी से पहुंच सकेंगे। इससे एक ही समय में कई विमानों की आवाजाही और परीक्षण गतिविधियों को बेहतर तरीके से संचालित करना संभव होगा।

400 फीट का गोलाकार पैड भी बना आकर्षण का केंद्र

उत्तरी हिस्से में लगभग 400 फीट व्यास वाला एक गोलाकार क्षेत्र भी तस्वीरों में दिखाई देता है। विश्लेषकों के अनुसार, इसका इस्तेमाल विमान के इंजन परीक्षण, विमान को घुमाने या परीक्षण के बाद उसकी तैयारी से जुड़ी गतिविधियों के लिए किया जा सकता है। यदि भविष्य में इसके आसपास अतिरिक्त ढांचा बनाया जाता है तो यह संवेदनशील परीक्षण उपकरणों को बाहरी निगरानी से आंशिक रूप से छिपाने में भी उपयोगी हो सकता है।

क्या अमेरिका के ‘एरिया 51’ जैसा बनेगा चीन का गुप्त केंद्र?

अमेरिका का एरिया 51 लंबे समय से अत्यंत गोपनीय विमान परीक्षण और उन्नत विमान तकनीक से जुड़ा रहा है। चीन के लोपनुर क्षेत्र में हो रहा विस्तार उसी तरह की गोपनीयता और दूरदराज भौगोलिक स्थिति के कारण उससे तुलना का आधार बन रहा है। हालांकि दोनों केंद्रों की वास्तविक भूमिका और संरचना अलग हो सकती है, लेकिन लोपनुर में बढ़ती गतिविधियां चीन की अत्याधुनिक विमान तकनीक विकसित करने की महत्वाकांक्षा को जरूर दर्शाती हैं।

सिर्फ लड़ाकू विमान ही नहीं, बड़े ड्रोन भी निशाने पर

इस क्षेत्र में चीन के अत्याधुनिक बिना पायलट वाले विमानों और स्टील्थ ड्रोन से जुड़े परीक्षणों की भी चर्चा होती रही है। बड़े आकार के फ्लाइंग-विंग ड्रोन और भविष्य की लंबी दूरी वाली विमान प्रणालियों के विकास के बीच इस तरह के विशाल परीक्षण केंद्र की जरूरत बढ़ सकती है। नए हैंगरों का आकार भी इस संभावना को मजबूत करता है कि आने वाले समय में यहां मौजूदा विमानों से कहीं बड़े प्लेटफॉर्म दिखाई दे सकते हैं।

चीन आखिर क्या छिपाकर तैयार कर रहा है?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि इतने बड़े पैमाने पर हो रहे निर्माण का अंतिम उद्देश्य क्या है। उपलब्ध तस्वीरों और विशेषज्ञ विश्लेषण से यह स्पष्ट होता है कि चीन इस केंद्र को अत्याधुनिक विमान परीक्षण के लिए अधिक सक्षम बना रहा है। लेकिन यहां कौन-सा विशिष्ट विमान या हथियार प्रणाली परीक्षण के लिए आएगी, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसलिए एच-20 या किसी अन्य अत्याधुनिक विमान के यहां परीक्षण को फिलहाल संभावना और विश्लेषण के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

आने वाले समय में बढ़ सकता है सामरिक महत्व

लोपनुर में हो रहा विस्तार केवल एक एयरबेस के निर्माण तक सीमित नहीं दिखाई देता। बड़े हैंगर, नए टैक्सीवे, विस्तृत एप्रन और परीक्षण संबंधी ढांचे मिलकर एक ऐसे परिसर की तस्वीर पेश करते हैं जो चीन के भविष्य के विमान कार्यक्रमों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। यदि निर्माण इसी गति से जारी रहा तो यह केंद्र आने वाले वर्षों में चीन के उन्नत लड़ाकू विमान, बड़े ड्रोन और रणनीतिक विमान विकास कार्यक्रमों का प्रमुख परीक्षण स्थल बन सकता है। फिलहाल इसकी सबसे बड़ी खासियत यही है कि विशाल रेगिस्तान के बीच बन रहा यह परिसर जितना दिखाई दे रहा है, उसके पीछे की वास्तविक सैन्य योजना उससे कहीं अधिक रहस्यमयी बनी हुई है।