नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर इन दिनों विरोध प्रदर्शनों का दौर जारी है। छात्रों की मांगों और 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के विरोध में शुरू हुआ आंदोलन अब देश के कई हिस्सों तक फैल चुका है। पटना, मुंबई, बेंगलुरु और कोलकाता सहित विभिन्न शहरों में भी प्रदर्शन आयोजित किए जा रहे हैं। 20 जुलाई को आयोजित 'चलो संसद' मार्च के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद यह मुद्दा और अधिक चर्चा में आ गया। इस घटना में कई लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई।
दिल्ली के घटनाक्रम के बीच वैश्विक कानूनों पर बढ़ी चर्चा
दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद यह सवाल फिर से चर्चा में है कि दुनिया के अलग-अलग देशों में विरोध प्रदर्शन को लेकर किस प्रकार के कानून लागू हैं। लोकतांत्रिक देशों में जहां निर्धारित नियमों और अनुमति के साथ शांतिपूर्ण प्रदर्शन की व्यवस्था है, वहीं कुछ देशों में सरकार के खिलाफ सार्वजनिक विरोध करने पर बेहद कठोर कार्रवाई का प्रावधान बताया जाता है।
उत्तर कोरिया में सरकार विरोध को सबसे गंभीर अपराध माना जाता है
उपलब्ध जानकारी के अनुसार उत्तर कोरिया उन देशों में शामिल है जहां सरकार के खिलाफ गतिविधियों को अत्यंत गंभीर अपराध माना जाता है। ऐसे मामलों में मृत्युदंड या आजीवन कठोर कारावास जैसी सख्त सजा का प्रावधान बताया जाता है। वहां सार्वजनिक विरोध प्रदर्शन की स्वतंत्रता लगभग नहीं के बराबर मानी जाती है।
चीन में बिना अनुमति प्रदर्शन पर सख्त कार्रवाई
चीन में सार्वजनिक प्रदर्शन को लेकर कड़े नियम लागू हैं। बताया जाता है कि कम्युनिस्ट पार्टी या संबंधित प्रशासनिक अनुमति के बिना बड़े पैमाने पर सड़क पर उतरकर प्रदर्शन करना गंभीर कानूनी उल्लंघन माना जा सकता है। ऐसे मामलों में लंबी अवधि तक कारावास सहित अन्य कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
ईरान और सऊदी अरब में भी कड़े नियम
ईरान और सऊदी अरब में भी सार्वजनिक विरोध प्रदर्शनों पर सख्त नियंत्रण रखा जाता है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार ईरान में कुछ मामलों में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोड़े मारने से लेकर मृत्युदंड तक के प्रावधान लागू किए जा सकते हैं। वहीं सऊदी अरब में कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कई वर्षों के कारावास या अन्य कठोर दंड का प्रावधान बताया जाता है।
रूस और बेलारूस में बिना अनुमति प्रदर्शन पर कार्रवाई
रूस में बिना अनुमति आयोजित विरोध प्रदर्शनों पर भारी जुर्माना और जेल की सजा का प्रावधान है। वहीं बेलारूस में सरकार विरोधी रैलियों को लेकर कानून और भी सख्त माने जाते हैं। रिपोर्टों के अनुसार ऐसे मामलों में प्रदर्शनकारियों को तत्काल हिरासत में लेकर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाती है।
तानाशाही शासन वाले देशों में अलग हैं हालात
जिन देशों में तानाशाही या अत्यधिक केंद्रीकृत शासन व्यवस्था है, वहां विरोध प्रदर्शनों को नियंत्रित करने के लिए पुलिस द्वारा आंसू गैस, वाटर कैनन और बल प्रयोग जैसे उपाय अपनाए जाने की खबरें समय-समय पर सामने आती रही हैं। कई मामलों में प्रदर्शनकारियों पर गंभीर आपराधिक धाराएं भी लगाई जाती हैं, जिससे भविष्य में बड़े आंदोलन खड़े होने की संभावना को कम किया जा सके।
लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर जारी है बहस
दिल्ली में जारी विरोध प्रदर्शनों और उसके बाद उठे सवालों ने एक बार फिर दुनिया भर में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार और मानवाधिकारों को लेकर बहस तेज कर दी है। अलग-अलग देशों के कानून और शासन व्यवस्था के अनुसार विरोध प्रदर्शन के नियम भी अलग-अलग हैं। इसलिए किसी भी देश में प्रदर्शन करने से पहले वहां के स्थानीय कानूनों और प्रशासनिक नियमों की जानकारी होना आवश्यक माना जाता है।
