पटना/नई दिल्ली। बिहार सरकार ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक, डिजिटल और गुणवत्तापूर्ण बनाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार से 7900 करोड़ रुपये के विशेष शिक्षा पैकेज की मांग की है। यह मांग बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के समक्ष राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय प्रगति समीक्षा बैठक के दौरान रखी। शिक्षा विभाग का कहना है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के लक्ष्यों को निर्धारित समय के भीतर पूरा करने और राज्य में बढ़ती शैक्षणिक आवश्यकताओं को देखते हुए यह विशेष सहायता आवश्यक है।
दिल्ली में हुई राष्ट्रीय समीक्षा बैठक में उठी बड़ी मांग
नई दिल्ली के पूसा स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) सभागार में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की अध्यक्षता में बुधवार से दो दिवसीय प्रगति समीक्षा बैठक शुरू हुई। इस बैठक में देश के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के शिक्षा मंत्रियों ने हिस्सा लिया। बैठक में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020, पीएम श्री योजना, पीएम पोषण योजना, निपुण भारत सहित केंद्र सरकार की विभिन्न शिक्षा योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई। साथ ही राज्यों ने शिक्षा क्षेत्र से जुड़े अपने सुझाव और आवश्यकताओं को भी केंद्र सरकार के समक्ष रखा।
मिथिलेश तिवारी ने रखा विशेष शिक्षा पैकेज का प्रस्ताव
बैठक में बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने राज्य की वर्तमान शैक्षणिक स्थिति, विद्यार्थियों की लगातार बढ़ती संख्या और आकांक्षी जिलों की चुनौतियों का उल्लेख करते हुए केंद्र सरकार से 7900 करोड़ रुपये के विशेष शिक्षा पैकेज की मांग की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के उद्देश्यों को समयबद्ध तरीके से लागू करने के लिए बिहार को अतिरिक्त वित्तीय सहयोग की आवश्यकता है।
बिहार शिक्षा विभाग के अनुसार, राज्य में विद्यालयी शिक्षा को आधुनिक और तकनीकी रूप से सशक्त बनाने के लिए बड़े पैमाने पर आधारभूत संरचना विकसित करने की जरूरत है। इसी उद्देश्य से केंद्र सरकार के समक्ष विशेष पैकेज का प्रस्ताव रखा गया है।
स्कूलों के भवन, लैब और डिजिटल कक्षाओं पर रहेगा विशेष जोर
शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने बैठक में बताया कि माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालयों के भवन निर्माण, अतिरिक्त कक्षाओं के निर्माण, विज्ञान एवं कंप्यूटर प्रयोगशालाओं की स्थापना, पुस्तकालयों के विकास, खेल सुविधाओं के विस्तार तथा डिजिटल कक्षाओं के निर्माण के लिए लगभग 3000 करोड़ रुपये की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए केवल भवन निर्माण ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि आधुनिक शिक्षण संसाधनों का विकास भी समय की मांग है।
आकांक्षी जिलों की शिक्षा व्यवस्था मजबूत करने पर विशेष फोकस
बैठक में बिहार सरकार ने राज्य के आकांक्षी जिलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए भी विशेष वित्तीय सहायता की मांग की। इस उद्देश्य के लिए 2000 करोड़ रुपये की आवश्यकता बताई गई है।
इस राशि का उपयोग स्मार्ट कक्षाओं की स्थापना, विज्ञान प्रयोगशालाओं के निर्माण, छात्रावासों के विकास, शिक्षकों के प्रशिक्षण कार्यक्रमों तथा छात्राओं को शिक्षा से जोड़ने वाली योजनाओं को मजबूत करने में किया जाएगा। शिक्षा विभाग का मानना है कि इन जिलों में आधारभूत सुविधाओं के विस्तार से शिक्षा की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार संभव होगा।
डिजिटल शिक्षा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित शिक्षण को मिलेगा बढ़ावा
बिहार सरकार ने डिजिटल शिक्षा के विस्तार के लिए भी केंद्र से विशेष सहयोग मांगा है। प्रस्ताव के अनुसार वर्चुअल लैब, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित शिक्षण प्रणाली, डिजिटल शिक्षण प्लेटफॉर्म और शिक्षकों के डिजिटल प्रशिक्षण कार्यक्रमों के विस्तार के लिए 1000 करोड़ रुपये की विशेष सहायता का अनुरोध किया गया है।
सरकार का मानना है कि आधुनिक तकनीक आधारित शिक्षा व्यवस्था विकसित करने से विद्यार्थियों को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप बेहतर शैक्षणिक अवसर मिल सकेंगे।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति को प्रभावी बनाने पर केंद्र का जोर
बैठक को संबोधित करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि यह सम्मेलन केवल योजनाओं की समीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि विकसित भारत के निर्माण के लिए साझा संकल्प का महत्वपूर्ण मंच भी है। उन्होंने कहा कि राज्यों के अनुभव, नवाचार और कार्य प्रणालियों के आधार पर राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को और अधिक प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा।
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों के संयुक्त प्रयासों से प्रत्येक बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण, समावेशी और भविष्य उन्मुख शिक्षा पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने शिक्षा क्षेत्र में राज्यों के सहयोग और सुझावों को महत्वपूर्ण बताते हुए आगामी कार्ययोजना पर समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।
