नई दिल्ली। देश की राजनीति और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा एक बड़ा घटनाक्रम शनिवार को सामने आया, जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया। इसके साथ ही केंद्र सरकार ने कैबिनेट मंत्री प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपने का निर्णय लिया। यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर लिया गया, जिसकी जानकारी राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी आधिकारिक सूचना में दी गई।
राष्ट्रपति ने स्वीकार किया इस्तीफा, प्रह्लाद जोशी को मिली नई जिम्मेदारी
राष्ट्रपति भवन के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने धर्मेंद्र प्रधान का मंत्रिपरिषद से इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। इसके साथ ही उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय का दायित्व संभाल रहे केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार भी सौंप दिया गया है। यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है।
धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार दोपहर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा भेजा था। इसके कुछ ही घंटों बाद राष्ट्रपति भवन की ओर से औपचारिक स्वीकृति जारी कर दी गई और शिक्षा मंत्रालय के नए प्रभार को लेकर भी निर्णय सार्वजनिक कर दिया गया।
नीट पेपर लीक मामले के बाद बढ़ा था दबाव
पिछले कई दिनों से नीट पेपर लीक मामले को लेकर देशभर में छात्रों का आंदोलन लगातार तेज हो रहा था। राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर हजारों छात्र प्रदर्शन कर रहे थे। आंदोलन का दायरा लगातार बढ़ता गया और 20 जुलाई को बड़ी संख्या में छात्रों ने दिल्ली के प्रमुख मार्गों से मार्च निकालते हुए संसद की ओर कूच किया। इस दौरान कुछ प्रदर्शनकारी संसद परिसर के बेहद निकट तक पहुंच गए थे।
छात्रों की प्रमुख मांगों में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाना भी शामिल था। इस मुद्दे को लेकर लगातार राजनीतिक गतिविधियां तेज बनी हुई थीं और सरकार तथा कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के बीच कई दौर की बातचीत भी चल रही थी। प्रारंभिक स्तर पर यह संकेत मिले थे कि सरकार धर्मेंद्र प्रधान को पद से नहीं हटाएगी, लेकिन शनिवार को घटनाक्रम अचानक बदला और उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
सरकार और सीजेपी के बीच बनी सहमति
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सरकार और कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रतिनिधिमंडल के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस बैठक में केंद्र सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह शामिल हुए।
बैठक के दौरान सरकार ने सीजेपी की दो अन्य प्रमुख मांगों को स्वीकार करने पर सहमति जताई। इनमें नीट पेपर लीक प्रकरण से जुड़े आत्महत्या करने वाले पीड़ितों के परिजनों को एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने तथा आंदोलन के दौरान देशभर में छात्रों पर दर्ज एफआईआर वापस लेने की मांग शामिल थी।
इन मांगों पर सहमति बनने के बाद सीजेपी ने तत्काल प्रभाव से अपना आंदोलन समाप्त करने की घोषणा कर दी। इसके बाद जंतर-मंतर पर धरना दे रहे छात्र अपने-अपने घरों की ओर लौटने लगे।
चार वर्षों से अधिक समय तक रहे शिक्षा मंत्री
धर्मेंद्र प्रधान ने 7 जुलाई 2021 को देश के शिक्षा मंत्री के रूप में कार्यभार संभाला था। उनके कार्यकाल के दौरान नई शिक्षा नीति समेत कई महत्वपूर्ण पहलें आगे बढ़ाई गईं। हालांकि हाल के दिनों में नीट पेपर लीक विवाद को लेकर विपक्षी दलों और छात्र संगठनों की ओर से लगातार उनके इस्तीफे की मांग की जा रही थी।
इसी बढ़ते राजनीतिक और छात्र दबाव के बीच उन्होंने अपने पद से त्यागपत्र देने का निर्णय लिया और शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा सौंप दिया।
युवाओं के नाम पत्र लिखकर बताई इस्तीफे की वजह
धर्मेंद्र प्रधान ने अपने इस्तीफे की घोषणा सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर युवाओं के नाम लिखे गए एक पत्र के माध्यम से की। उन्होंने अपने पत्र में कहा कि देश के विद्यार्थियों का भविष्य सुरक्षित रहे और वर्तमान परिस्थितियों का कोई राष्ट्र विरोधी तत्व लाभ न उठा सके, इसी उद्देश्य से उन्होंने यह निर्णय लिया है।
उन्होंने अपने पत्र में लिखा कि जंतर-मंतर और देशभर में जो परिस्थितियां बनी हैं, उनका लाभ राष्ट्र विरोधी ताकतें न उठा सकें, देश की एकता बनी रहे और किसी भी विद्यार्थी का भविष्य कानूनी जटिलताओं में न फंसे। उन्होंने कहा कि छात्र अपना समय पढ़ाई और अपने करियर के निर्माण में लगाएं, इसी विचार के साथ उन्होंने प्रधानमंत्री को अपना त्यागपत्र भेज दिया।
