नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर जारी विवाद के बीच भारत निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूचियों को अद्यतन करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। आयोग ने गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026 को 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SSR) कराने की घोषणा की। इस प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची में पात्र नागरिकों के नाम शामिल करना, मौजूदा प्रविष्टियों में सुधार करना और सूची को अधिक सटीक बनाना है। इस फैसले का महत्व इसलिए भी बढ़ गया है, क्योंकि इसमें उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, मणिपुर और गोवा जैसे वे राज्य भी शामिल हैं, जहां वर्ष 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं।
1 जनवरी 2027 होगी पात्रता की अहम तारीख
निर्वाचन आयोग ने संबंधित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को भेजे पत्र में बताया कि इस पुनरीक्षण के लिए 1 जनवरी 2027 को पात्रता तिथि माना जाएगा। इसका अर्थ है कि मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के पात्र नागरिकों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत पंजीकरण का अवसर मिलेगा। आयोग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पात्र मतदाता सूची से बाहर न रहें और सूची में दर्ज जानकारी को आवश्यकतानुसार दुरुस्त किया जा सके।
युवाओं और पहली बार वोट डालने वालों पर विशेष ध्यान
विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण के तहत उन युवाओं को मतदाता सूची में शामिल करने पर जोर दिया जाएगा, जो मतदान के लिए पात्र हो रहे हैं। खासतौर पर पहली बार मतदान करने वाले नागरिकों के लिए यह प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। आयोग ने बताया कि 2 नवंबर से शुरू होने वाली एसएसआर प्रक्रिया के दौरान ऐसे युवा नागरिक अग्रिम आवेदन भी कर सकेंगे, जो अगले वर्ष 1 अप्रैल, 1 जुलाई और 1 अक्टूबर तक 18 वर्ष की आयु पूरी कर लेंगे। इससे युवाओं को समय रहते मतदाता पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू करने का अवसर मिलेगा।
2027 में विधानसभा चुनाव वाले पांच राज्यों पर भी नजर
आयोग की इस घोषणा में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, मणिपुर और गोवा प्रमुख रूप से शामिल हैं। इन राज्यों में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं, इसलिए मतदाता सूची को अद्यतन करने की प्रक्रिया चुनावी तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। 403 सदस्यीय उत्तर प्रदेश विधानसभा का कार्यकाल अगले वर्ष 22 मई को समाप्त हो रहा है। वहीं, 60 सदस्यीय मणिपुर विधानसभा, 40 सदस्यीय गोवा विधानसभा, 117 सदस्यीय पंजाब विधानसभा और 70 सदस्यीय उत्तराखंड विधानसभा का कार्यकाल मार्च 2027 में अलग-अलग तारीखों पर समाप्त होगा। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के तहत निर्वाचन आयोग को विधानसभा का कार्यकाल समाप्त होने से छह महीने पहले चुनाव कराने का अधिकार है। ऐसे में मतदाता सूची में नाम जोड़ने, गलतियों को सुधारने और अन्य आवश्यक संशोधनों की प्रक्रिया चुनावी तैयारियों का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
इन 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में होगा पुनरीक्षण
निर्वाचन आयोग की घोषणा के अनुसार, विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण के दायरे में 17 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश शामिल हैं। इनमें आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, चंडीगढ़, दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, दिल्ली, ओडिशा, सिक्किम, त्रिपुरा और तेलंगाना शामिल हैं। इन क्षेत्रों में मतदाता सूची को अद्यतन करने के लिए पुनरीक्षण कार्यक्रम निर्धारित किया जाएगा। हालांकि, जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया अभी जारी है या हाल ही में पूरी हुई है, वहां एसएसआर का कार्यक्रम उचित समय पर घोषित किया जाएगा।
मौसम को ध्यान में रखकर तय होगा कार्यक्रम
आयोग ने स्पष्ट किया है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण का कार्यक्रम तय करते समय संबंधित क्षेत्रों की परिस्थितियों और मौसम को भी ध्यान में रखा जाएगा। जिन इलाकों में एसआईआर की प्रक्रिया जारी है या हाल में पूरी हुई है, वहां तत्काल कार्यक्रम लागू करने के बजाय उपयुक्त समय पर तारीखों की घोषणा की जाएगी। हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में भी मतदाता सूचियों की समीक्षा का कार्यक्रम मौसम की परिस्थितियों को ध्यान में रखकर बाद में घोषित किया जाएगा। आयोग के अनुसार, इन क्षेत्रों में अभी विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया शुरू नहीं कराई गई है। इसलिए यहां मतदाता सूची की समीक्षा से जुड़ी समय-सारिणी अलग से निर्धारित की जाएगी।
मतदाता सूची में नाम जुड़वाने और सुधार का मिलेगा अवसर
विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण का एक प्रमुख उद्देश्य मतदाता सूची में पात्र नागरिकों के नाम दर्ज करना और पहले से दर्ज विवरणों में आवश्यक सुधार करना है। जिन नागरिकों का नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं है, वे निर्धारित नियमों और प्रक्रिया के अनुसार पंजीकरण के लिए आवेदन कर सकेंगे। वहीं, सूची में दर्ज जानकारी में त्रुटि होने पर उसे ठीक कराने का अवसर भी मिलेगा। मतदाता सूची में सही और अद्यतन जानकारी होना स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव के लिए आवश्यक है। इस प्रक्रिया के माध्यम से आयोग का प्रयास है कि अधिक से अधिक पात्र नागरिकों को मतदान के अधिकार का उपयोग करने का अवसर मिले। विशेष रूप से पहली बार मतदान करने वाले युवाओं के लिए अग्रिम आवेदन की व्यवस्था महत्वपूर्ण होगी।
SIR विवाद के बीच SSR की घोषणा क्यों महत्वपूर्ण?
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चल रहे विवाद के बीच विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SSR) की घोषणा ने मतदाता सूची से जुड़ी गतिविधियों को फिर चर्चा में ला दिया है। दोनों प्रक्रियाओं का संबंध मतदाता सूची की समीक्षा से है, लेकिन आयोग की ताजा घोषणा के अनुसार एसएसआर के माध्यम से पात्र मतदाताओं को जोड़ने और सूची में सुधार करने पर ध्यान दिया जाएगा। अगले वर्ष विधानसभा चुनाव वाले राज्यों को इस प्रक्रिया में शामिल किए जाने से मतदाता सूची के अद्यतन कार्य का महत्व और बढ़ गया है। हालांकि, संबंधित क्षेत्रों में प्रक्रिया की वास्तविक समय-सारिणी और अन्य निर्देशों के लिए निर्वाचन आयोग तथा मुख्य निर्वाचन अधिकारियों की आधिकारिक घोषणाएं महत्वपूर्ण रहेंगी।
पात्र नागरिक समय पर रखें मतदाता पंजीकरण पर नजर
निर्वाचन आयोग की घोषणा के बाद पात्र नागरिकों, विशेषकर 18 वर्ष की आयु पूरी करने जा रहे युवाओं को मतदाता पंजीकरण से संबंधित आधिकारिक जानकारी पर नजर रखनी चाहिए। आवेदन, नाम जोड़ने और विवरण में सुधार की प्रक्रिया के लिए संबंधित निर्वाचन अधिकारियों की ओर से जारी निर्देशों का पालन करना जरूरी होगा। कुल मिलाकर, 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण कराने का फैसला मतदाता सूची को अद्यतन करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इस प्रक्रिया में पात्र मतदाताओं को शामिल करने, गलतियों को सुधारने और पहली बार मतदान करने वाले युवाओं को पंजीकरण का अवसर देने पर जोर रहेगा। अब संबंधित क्षेत्रों में कार्यक्रम की विस्तृत समय-सारिणी और आगे जारी होने वाले निर्देशों पर नजर रहेगी।
