
New delhi
पटना। मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी ने नई दिल्ली में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी.आर. पाटिल से मुलाकात की। इस दौरान बिहार की प्रमुख सिंचाई, जल संसाधन और बाढ़ प्रबंधन परियोजनाओं की प्रगति, लंबित स्वीकृतियों और आगामी कार्ययोजना पर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में उपमुख्यमंत्री सह जल संसाधन मंत्री श्री विजय कुमार चौधरी भी मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री ने केंद्रीय बजट 2024-25 और 2025-26 में बिहार के लिए घोषित लंबित सिंचाई एवं बाढ़ प्रबंधन परियोजनाओं को जल्द स्वीकृति देने और केंद्रीय सहायता उपलब्ध कराने का आग्रह किया। उन्होंने बताया कि केंद्रीय बजट 2024-25 में 11,500 करोड़ रुपये की लागत वाली कोसी-मेची अंतर्राज्यीय रिवर लिंक परियोजना समेत सिंचाई एवं जल संसाधन क्षेत्र की कई योजनाओं के लिए वित्तीय सहायता की घोषणा की गई थी। बिहार सरकार ने 16,339.18 करोड़ रुपये की परियोजनाओं के डीपीआर केंद्र को उपलब्ध कराए हैं, लेकिन अब तक केवल 2 परियोजनाओं को स्वीकृति मिली है।
बैठक में कोसी-मेची अंतर्राज्यीय रिवर लिंक परियोजना पर विशेष चर्चा हुई। करीब 3,652.56 करोड़ रुपये की इस परियोजना का उद्देश्य कोसी बेसिन के अतिरिक्त जल का बेहतर उपयोग कर उत्तर बिहार में सिंचाई सुविधाओं का विस्तार करना है। इसके प्रथम चरण के लिए वित्तीय वर्ष 2025-26 में 395.41 करोड़ रुपये और 2026-27 में 570 करोड़ रुपये, यानी कुल 965.41 करोड़ रुपये का प्रावधान है। अब तक केवल 156.745 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं। मुख्यमंत्री ने प्रथम चरण की शेष राशि जल्द उपलब्ध कराने और दूसरे चरण के डीपीआर को मंजूरी देने का अनुरोध किया।
मुख्यमंत्री ने सिकरहना दायां तटबंध निर्माण योजना का भी मुद्दा उठाया। 125.08 करोड़ रुपये के केंद्रीय अंश वाली इस योजना की संबंधित केंद्रीय समिति पहले ही अनुशंसा कर चुकी है। मुख्यमंत्री ने इसके लिए केंद्रीय सहायता जल्द उपलब्ध कराने का आग्रह किया। इसके अलावा केंद्रीय बजट 2024-25 के तहत प्रस्तावित सिंचाई क्षेत्र की 3 परियोजनाओं, जिनकी अनुमानित लागत 5,951.45 करोड़ रुपये है, तथा बाढ़ प्रबंधन क्षेत्र की 15 परियोजनाओं, जिनकी अनुमानित लागत 3,896.14 करोड़ रुपये है, की स्थिति पर भी चर्चा हुई।
केंद्रीय बजट 2025-26 में घोषित पश्चिमी कोसी नहर परियोजना के विस्तार, नवीकरण एवं आधुनिकीकरण (ERM) की भी समीक्षा की गई। बिहार सरकार ने इसके लिए 8,338.89 करोड़ रुपये का डीपीआर केंद्रीय जल आयोग को भेजा है। केंद्रीय सहायता की अपेक्षा में राज्य सरकार अपने संसाधनों से 3,484.24 करोड़ रुपये की लागत वाले प्रथम चरण का कार्य शुरू कर चुकी है। मुख्यमंत्री ने परियोजना की शीघ्र स्वीकृति और केंद्रीय वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने का अनुरोध किया।
बाढ़ नियंत्रण के लिए चल रहे फ्लड मैनेजमेंट एंड बॉर्डर एरिया प्रोग्राम (FMBAP) के तहत बिहार का बजटीय प्रावधान बढ़ाने की आवश्यकता पर भी मुख्यमंत्री ने जोर दिया। उन्होंने कहा कि बिहार देश के सबसे अधिक बाढ़ प्रभावित राज्यों में से एक है। राज्य का करीब 73 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र बाढ़ की चपेट में आता है और गंगा, कोसी और बागमती जैसी नदियों के कारण हर वर्ष बड़ी आबादी प्रभावित होती है।
2026-27 के बजट में तीन परियोजनाएं शामिल करने का आग्रह
मुख्यमंत्री ने आगामी केंद्रीय बजट 2026-27 में बिहार की तीन बड़ी परियोजनाओं को शामिल करने का अनुरोध किया। इनमें इंद्रपुरी जलाशय परियोजना, सोन-फल्गु रिवर लिंक परियोजना और सारण जिला बाढ़ नियंत्रण एवं जलनिकासी परियोजना (फेज-1) शामिल हैं।
इंद्रपुरी जलाशय परियोजना से सोन नहर प्रणाली को दीर्घकालिक स्थिरता मिलने की उम्मीद है। बिहार और झारखंड के बीच सोन नदी जल बंटवारे को लेकर एमओयू पर हस्ताक्षर होने के बाद इस परियोजना को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हुआ है।
सोन-फल्गु रिवर लिंक परियोजना के तहत सोन नदी के पानी को पाइपलाइन और नहरों के माध्यम से फल्गु नदी तक पहुंचाने की योजना है। इससे गयाजी और औरंगाबाद के सूखाग्रस्त क्षेत्रों में सिंचाई, पेयजल और औद्योगिक उपयोग के लिए पानी उपलब्ध होगा। साथ ही फल्गु नदी में सालभर जल उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
वहीं सारण जिला बाढ़ नियंत्रण एवं जलनिकासी परियोजना (फेज-1) की अनुमानित लागत 1,350.95 करोड़ रुपये है। इसके तहत मुख्य जलनिकासी चैनलों का जीर्णोद्धार, नए रेगुलेटरों का निर्माण और अन्य संरचनात्मक कार्य किए जाएंगे। इससे सारण में बाढ़ का प्रभाव कम करने और कृषि भूमि की सुरक्षा के साथ प्रस्तावित सोनपुर अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट, एयरोसिटी और आसपास के शहरी क्षेत्रों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री ने गंगा बाढ़ नियंत्रण आयोग (GFCC) के अध्यक्ष का मुख्यालय पटना में बनाए रखने का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि बिहार गंगा बेसिन का सबसे अधिक बाढ़ प्रभावित राज्य है, इसलिए आयोग की प्रभावी निगरानी और त्वरित निर्णय के लिए इसका पटना में रहना जरूरी है।
बैठक में भारत-बांग्लादेश गंगा जल संधि के नवीनीकरण और बिहार के हितों पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने फरक्का बराज एवं भारत-बांग्लादेश जल संधि से उत्पन्न गाद, नदी की धारा में बदलाव और बाढ़ की समस्या के स्थायी समाधान के लिए राष्ट्रीय गाद प्रबंधन नीति और समर्पित कोष बनाने का आग्रह किया। साथ ही बिहार की सिंचाई, पेयजल और औद्योगिक जरूरतों के लिए पर्याप्त जल उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की।
नेपाल से जुड़ी परियोजनाओं पर भी जोर
मुख्यमंत्री ने नेपाल से जुड़ी लंबित परियोजनाओं में कोसी हाई डैम, कमला बहुउद्देशीय परियोजना और बागमती बांध परियोजना को जल्द आगे बढ़ाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने संयुक्त परियोजना कार्यालय (JPO) में बिहार के प्रतिनिधियों की भागीदारी सुनिश्चित करने और डीपीआर तैयार करने की प्रक्रिया में तेजी लाने का अनुरोध किया। इन परियोजनाओं के पूरा होने से उत्तर बिहार को बाढ़ से राहत, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार और जलविद्युत उत्पादन के नए अवसर मिलने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार बिहार के विकास को निरंतर प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से बिहार की महत्वपूर्ण सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण परियोजनाओं को शीघ्र गति मिलेगी, जिससे किसानों, ग्रामीण क्षेत्रों और राज्य की अर्थव्यवस्था को व्यापक लाभ पहुंचेगा।
