erer | Source: ererनई दिल्ली। दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर शनिवार को उस समय हैरान करने वाला घटनाक्रम सामने आया, जब मुंबई से दिल्ली पहुंचे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के तीन प्रमुख नेताओं को विमान के भीतर ही पुलिस ने हिरासत में ले लिया। आमतौर पर विमान से यात्रियों के उतरने के बाद होने वाली पुलिस कार्रवाई के बजाय इस बार अधिकारी सीधे विमान के अंदर पहुंच गए। सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर हुई कि नेताओं को हिरासत में लेने के लिए पुरुष पुलिसकर्मियों के बजाय महिला अधिकारियों की टीम को आगे किया गया। इस कार्रवाई में अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को विमान से ही अपने साथ ले जाया गया।

विमान में घुसी पुलिस टीम, नारेबाजी से गूंजा माहौल

CJP के ये नेता मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दिल्ली में आयोजित विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए मुंबई से पहुंचे थे। एयर इंडिया की उड़ान के दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरते ही पुलिसकर्मी विमान के भीतर दाखिल हो गए और तीनों नेताओं को हिरासत में लेने की कार्रवाई शुरू कर दी। इस दौरान नेताओं ने ‘इंकलाब जिंदाबाद’ और ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाए। विमान के अंदर अचानक पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी और नेताओं की नारेबाजी से माहौल तनावपूर्ण हो गया।

घटनाक्रम के सामने आए वीडियो में महिला पुलिसकर्मी तीनों नेताओं को घेरे हुए दिखाई देती हैं। अभिजीत दीपके पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते नजर आते हैं। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि उन्हें विमान से उतरने का इंतजार किया जा सकता था। हालांकि, पुलिस ने विमान के भीतर ही हिरासत की कार्रवाई पूरी की और तीनों नेताओं को अलग-अलग स्थानों पर ले जाया गया।

आखिर महिला अधिकारियों को ही क्यों सौंपी गई जिम्मेदारी?

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा ध्यान पुलिस की उस रणनीति पर गया, जिसके तहत CJP नेताओं को हिरासत में लेने के लिए महिला अधिकारियों को विमान के भीतर भेजा गया। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, इस बारे में स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई कि दिल्ली पुलिस ने जानबूझकर महिला अधिकारियों की तैनाती का फैसला किया था या नहीं। हालांकि, इसके पीछे संभावित टकराव को रोकने की रणनीति होने की चर्चा है।

विमान के भीतर यात्रियों की सीटों के बीच गलियारे काफी संकरे होते हैं और लोगों के एक साथ इधर-उधर जाने के लिए सीमित जगह होती है। ऐसी स्थिति में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच मामूली धक्का-मुक्की भी बड़े विवाद का रूप ले सकती है। ऐसे में महिला अधिकारियों की मौजूदगी को तनाव कम रखने और कार्रवाई के दौरान संभावित हंगामे से बचने के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है।

हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि महिला अधिकारियों की तैनाती के पीछे यही कारण था, इसकी पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। इसलिए इसे सामने आई रिपोर्ट के आधार पर व्यक्त की गई संभावना के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

पहले के पुलिस कार्रवाई विवाद से भी जुड़ रहा मामला

CJP और पुलिस के बीच पहले भी प्रदर्शन के दौरान कार्रवाई को लेकर विवाद सामने आ चुका है। खबर के अनुसार, पेपर लीक के विरोध में संसद की ओर मार्च कर रहे छात्र प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच 20 जुलाई को झड़प हुई थी। इसके बाद CJP ने पुरुष पुलिसकर्मियों पर लड़कियों के साथ मारपीट करने का आरोप लगाया था।

CJP ने दावा किया था कि प्रदर्शन के दौरान 12 साल तक की लड़कियों के सिर फोड़ दिए गए और उनके कपड़े फाड़े गए। ये आरोप CJP की ओर से लगाए गए थे। उपलब्ध जानकारी में इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि का विवरण नहीं दिया गया है।

इसी पृष्ठभूमि में विमान के भीतर महिला पुलिस अधिकारियों की तैनाती को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। रिपोर्ट में यह संभावना जताई गई है कि पुलिस ऐसी स्थिति से बचना चाहती होगी, जिसमें पुरुष अधिकारियों द्वारा नेताओं को पकड़ने के दौरान विवाद बढ़ जाता और घटना को लेकर एक नया राजनीतिक या सामाजिक मुद्दा खड़ा हो जाता।

युवा समर्थकों वाली पार्टी को लेकर पुलिस की सतर्कता की चर्चा

CJP के समर्थकों में बड़ी संख्या युवाओं और जेनरेशन जेड यानी Gen Z से जुड़े लोगों की बताई जाती है। ऐसे में प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई का वीडियो सामने आने पर उसके व्यापक स्तर पर चर्चा में आने की आशंका को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

हालांकि, पुलिस ने महिला अधिकारियों को भेजने का फैसला इसी सोच के तहत किया था या नहीं, इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान उपलब्ध नहीं है। फिलहाल यह एक संभावित व्याख्या है कि महिला अधिकारियों की मौजूदगी से कार्रवाई के दौरान टकराव की आशंका कम हो सकती थी।

दिल्ली में CJP के विरोध प्रदर्शन से पहले सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस की तैयारियों को लेकर भी चर्चा हो रही थी। ऐसे माहौल में विमान के भीतर हुई यह कार्रवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण बन गई, क्योंकि इसमें नेताओं को एयरपोर्ट पर उतरने के बाद रोकने के बजाय सीधे विमान के अंदर हिरासत में लिया गया।

फोन पर रिकॉर्डिंग करते दिखे अभिजीत दीपके

विमान के भीतर पुलिस के पहुंचते ही अभिजीत दीपके ने खिड़की वाली सीट पर बैठे-बैठे अपने फोन से घटनाक्रम की रिकॉर्डिंग शुरू कर दी। सौरव दास बीच वाली सीट पर बैठे थे, जबकि आशुतोष रांका उनके बगल में मौजूद थे।

वीडियो में दिखाई देता है कि पुलिसकर्मियों को सामने देखकर तीनों नेताओं ने नारेबाजी शुरू कर दी। इसके बाद महिला अधिकारियों ने उन्हें घेर लिया और सहयोग करने के लिए कहा। दीपके इस दौरान पुलिस की कार्रवाई के तरीके पर सवाल उठाते रहे।

उन्होंने कहा, “आप देख सकते हैं कि देश किस ओर जा रहा है। वे हमें सीधे फ्लाइट से ही गिरफ्तार करने आए हैं। ऐसा तो इंदिरा गांधी ने भी नहीं किया था। यह तानाशाही है।”

दीपके ने आगे पुलिसकर्मियों से कहा, “मैं यहां गिरफ्तार होने ही आया हूं, मुझे गिरफ्तार करें।”

उनके इस बयान से स्पष्ट था कि वह हिरासत की कार्रवाई का विरोध करने के साथ-साथ उसके तरीके पर भी सवाल उठा रहे थे। दूसरी ओर, वीडियो में महिला अधिकारी नेताओं से सहयोग करने का आग्रह करती दिखाई देती हैं। इसके बाद अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को अलग-अलग स्थानों पर ले जाया गया।

विमान के भीतर कार्रवाई ने खड़े किए कई सवाल

इस घटना ने पुलिस की कार्रवाई के तरीके, हिरासत के लिए चुनी गई जगह और महिला अधिकारियों की तैनाती को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर CJP नेताओं ने विमान के भीतर हिरासत में लिए जाने पर आपत्ति जताई, वहीं दूसरी ओर महिला अधिकारियों की मौजूदगी को संभावित टकराव से बचने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

हालांकि, पुलिस की ओर से इस विशेष तैनाती के पीछे का आधिकारिक कारण सामने नहीं आने तक किसी एक निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि दिल्ली एयरपोर्ट पर हुई इस कार्रवाई ने CJP के विरोध प्रदर्शन से पहले ही राजनीतिक और पुलिसिया रणनीति को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।