erer | Source: ereबेंगलुरु। कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में हुए चर्चित ट्रिपल मर्डर मामले की जांच में ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिन्होंने जांच एजेंसियों के साथ-साथ आम लोगों को भी हैरान कर दिया है। पुलिस के अनुसार, मामले के मुख्य आरोपी ने कथित तौर पर हत्या की योजना बनाने से लेकर सबूत मिटाने तक के विभिन्न पहलुओं पर एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) चैटबॉट से जानकारी ली थी। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी लंबे समय से इस अपराध की तैयारी कर रहा था और डिजिटल माध्यमों का उपयोग कर संभावित तरीकों की जानकारी जुटा रहा था।

22 जून को हुई थी एक ही परिवार के तीन लोगों की हत्या

यह मामला 22 जून का है। बेंगलुरु के के.आर. पुरम पुलिस थाना क्षेत्र के सीगेहल्ली स्थित एक अपार्टमेंट में 52 वर्षीय सोमसुंदर, उनकी 48 वर्षीय पत्नी मुथुलक्ष्मी और 19 वर्षीय बेटी सुप्रिया मृत पाए गए थे। पुलिस के अनुसार, तीनों की चाकू से हमला कर हत्या की गई थी। इस घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी थी।

बड़ी बेटी और उसके लिव-इन पार्टनर की हुई गिरफ्तारी

जांच के दौरान पुलिस ने मृत दंपति की बड़ी बेटी श्वेता और उसके लिव-इन पार्टनर केनेथ को पुडुचेरी से अलग-अलग गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, दोनों घटना के बाद वहां चले गए थे और गिरफ्तारी से बचने के लिए छिपे हुए थे। पूछताछ और जांच के आधार पर पुलिस ने दोनों को मामले में आरोपी बनाया।

पैसों का विवाद और पारिवारिक तनाव बना जांच का आधार

पुलिस जांच के अनुसार, इस मामले के पीछे आर्थिक विवाद और पारिवारिक संबंधों में तनाव प्रमुख कारण के रूप में सामने आए हैं। जांच में यह जानकारी मिली कि श्वेता ने अपने लिव-इन पार्टनर केनेथ के क्लाउड किचन व्यवसाय के लिए अपनी मां मुथुलक्ष्मी से लगभग 50 लाख रुपये उधार लिए थे।

पुलिस के अनुसार, यह राशि खर्च हो चुकी थी और उसे वापस करने को लेकर दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ गया था। जांच एजेंसियां इसी आर्थिक विवाद और पारिवारिक मतभेद को मामले की अहम कड़ी मानकर जांच आगे बढ़ा रही हैं।

AI चैटबॉट से कथित तौर पर ली गई थी जानकारी

पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, जांच के दौरान यह जानकारी सामने आई कि मुख्य आरोपी केनेथ ने कथित रूप से AI चैटबॉट का उपयोग कर विभिन्न विषयों पर जानकारी जुटाई। पुलिस का दावा है कि आरोपी ने हत्या करने, घटनास्थल से जुड़े साक्ष्यों को मिटाने, खून के धब्बों को साफ करने तथा शवों के निपटान से जुड़े तरीकों के बारे में भी AI चैटबॉट से प्रश्न किए थे।

जांच एजेंसियों के अनुसार, डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर इस पहलू की भी जांच की जा रही है कि आरोपी ने किन-किन माध्यमों से जानकारी प्राप्त की और उसका अपराध की योजना में किस प्रकार उपयोग किया।

डिजिटल रिकॉर्ड की भी हो रही जांच

रिपोर्ट के अनुसार, बेंगलुरु पुलिस ने जांच के दौरान संबंधित AI टूल उपलब्ध कराने वाली कंपनी से आरोपी और चैटबॉट के बीच हुई बातचीत का रिकॉर्ड भी मांगा। पुलिस का कहना है कि डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच से अपराध की योजना से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं।

हालांकि, जांच अभी जारी है और पुलिस सभी डिजिटल साक्ष्यों का परीक्षण कर रही है।

पूछताछ में आरोपी ने किया कथित खुलासा

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, पूछताछ के दौरान मुख्य आरोपी केनेथ ने कथित रूप से स्वीकार किया कि उसने एक मामूली विवाद के बाद श्वेता के परिवार के सदस्यों की हत्या करने का निर्णय लिया था। अधिकारियों का यह भी कहना है कि आरोपी ने स्वीकार किया कि वह लंबे समय तक अपराध की योजना तैयार करता रहा और इस दौरान AI चैटबॉट से भी जानकारी प्राप्त करता रहा।

इन दावों की पुष्टि पुलिस जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की जा रही है।

तकनीक के दुरुपयोग पर उठे सवाल

इस घटना के सामने आने के बाद आधुनिक तकनीक, विशेषकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के संभावित दुरुपयोग को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि AI का उद्देश्य लोगों को जानकारी और सहायता उपलब्ध कराना है, लेकिन यदि कोई व्यक्ति इसका गलत इस्तेमाल करने का प्रयास करता है तो वह कानून के दायरे में आता है। जांच एजेंसियां इस मामले में डिजिटल साक्ष्यों और तकनीकी पहलुओं की भी गहन जांच कर रही हैं।