
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी बहुदेशीय विदेश यात्रा के चौथे चरण में आज नॉर्वे की राजधानी ओस्लो पहुंच चुके हैं। भारतीय समयानुसार, ओस्लो हवाई अड्डे पर नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर ने खुद पीएम मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया। इसके बाद प्रवासी भारतीयों ने भी पारंपरिक सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ प्रधानमंत्री का जोरदार स्वागत किया।
यह दौरा सिर्फ एक सामान्य कूटनीतिक मुलाकात नहीं है, बल्कि भारत और नॉर्डिक देशों के रिश्तों के इतिहास में एक नया अध्याय है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि पूरी रिसर्च के मुताबिक इस दौरे के मुख्य एजेंडे क्या हैं और यह इतना महत्वपूर्ण क्यों है।
हाल ही में भारत और देशों (जिसमें नॉर्वे, स्विट्जरलैंड, आइसलैंड और लिचेंस्टीन शामिल हैं) के बीच एक बड़ा मुक्त व्यापार समझौता (TEPA) लागू हुआ है। इस दौरे का सबसे बड़ा उद्देश्य इस समझौते का फायदा उठाकर दोनों देशों के बीच व्यापार को नई ऊंचाइयों पर ले जाना है। वर्तमान में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग $2.73 बिलियन डॉलर का है, जिसे तेजी से बढ़ाने की योजना है।
नॉर्वे रिन्यूएबल एनर्जी (नवीकरणीय ऊर्जा) और ग्रीन टेक के मामले में दुनिया का अग्रणी देश है। भारत अपने महत्वाकांक्षी कार्बन-न्यूट्रल लक्ष्यों को पूरा करने के लिए नॉर्वे से ग्रीन हाइड्रोजन, पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों और पवन ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर बात कर रहा है।
भू-राजनीतिक और वैश्विक अस्थिरता के इस दौर में भारत का नॉर्डिक देशों के करीब आना एक बेहतरीन रणनीतिक कदम है। नॉर्वे जैसी मजबूत अर्थव्यवस्था के साथ तकनीक और व्यापार का यह तालमेल भारत को आने वाले समय में यूरोपियन मार्केट में और मजबूती देगा।
