ere | Source: ereनई दिल्ली। देश की चुनावी प्रक्रिया और कथित वोट चोरी के मुद्दे पर कांग्रेस के नेतृत्व वाले इंडिया गठबंधन ने केंद्र सरकार के खिलाफ अपना विरोध तेज कर दिया है। शुक्रवार को विपक्षी दलों के सांसदों ने लगातार चौथे दिन विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर प्रदर्शन किया। इस दौरान विपक्ष ने एक ओर राष्ट्रपति भवन तक पैदल मार्च निकाला, वहीं दूसरी ओर कई सांसद कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा की अगुवाई में विजय चौक पर धरने पर बैठ गए। इस राजनीतिक घटनाक्रम के बीच लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के उस बयान ने भी ध्यान खींचा, जिसमें उन्होंने दावा किया कि यदि विपक्ष पिछले तीन-चार दिनों की तरह अपना दबाव बनाए रखता है, तो सरकार गिर जाएगी।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिले 10 प्रमुख विपक्षी नेता

संसद भवन के केंद्रीय कक्ष में इंडिया गठबंधन के घटक दलों के नेताओं की बैठक के बाद विपक्षी सांसदों और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने संसद भवन से राष्ट्रपति भवन तक पैदल मार्च किया। इसके बाद राहुल गांधी के नेतृत्व में 10 नेताओं का प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति भवन के अंदर गया और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को ज्ञापन सौंपा। विपक्षी नेताओं ने ज्ञापन के माध्यम से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया रद्द करने सहित कई मांगें उठाईं। इस प्रतिनिधिमंडल में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPI-M) के महासचिव एमए बेबी और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के महासचिव डी राजा शामिल रहे। इनके अतिरिक्त समाजवादी पार्टी के सांसद राजीव राय, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री एवं नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) की नेता सुप्रिया सुले, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के मनोज झा और तमिलनाडु से आने वाले टी तिरुमालवन भी प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे।

राष्ट्रपति भवन के अंदर ज्ञापन, विजय चौक पर जारी रहा धरना

जब विपक्षी नेताओं का प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति से मुलाकात करने पहुंचा, उसी समय बाकी सांसदों ने विजय चौक पर अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखा। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा की अगुवाई में सांसद सड़क पर बैठ गए और केंद्र सरकार तथा मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने चुनावी प्रक्रिया को लेकर अपनी चिंताएं जाहिर करते हुए राष्ट्रपति से हस्तक्षेप करने की अपील की। विजय चौक पर प्रियंका गांधी के साथ कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार, कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल, तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा और अभिषेक बनर्जी सहित कई नेता मौजूद थे। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई, रंजीत रंजन और रेणुका चौधरी समेत अन्य विपक्षी नेताओं ने भी प्रदर्शन में भाग लिया। प्रदर्शन कर रहे सांसदों का कहना था कि उन्हें राष्ट्रपति से लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने की उम्मीद है। विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग दोहराई। इस तरह एक ही समय में विपक्ष के दो समूहों ने अपनी बात राष्ट्रपति तक पहुंचाने और सरकार के खिलाफ राजनीतिक दबाव बनाए रखने की कोशिश की।

राहुल गांधी का दावा- सरकार की नींव हिल चुकी है

इंडिया गठबंधन के सांसदों को संविधान सदन के केंद्रीय कक्ष में संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि विपक्ष के प्रदर्शनों ने सरकार की नींव हिला दी है और सरकार अब डरी हुई है। उन्होंने इस मुद्दे को केवल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार तक सीमित मानने से इनकार किया और कहा कि समस्या इससे कहीं अधिक गहरी है। राहुल गांधी के अनुसार, मौजूदा हालात में सरकार को हटाना जरूरी है। उन्होंने विपक्षी नेताओं और सांसदों से आंदोलन के दौरान बनाए गए दबाव को जारी रखने की अपील की। उनके बयान का मुख्य संदेश यह था कि यदि विपक्ष एकजुट होकर लगातार विरोध करता रहा, तो केंद्र सरकार पर इसका बड़ा राजनीतिक असर पड़ सकता है। हालांकि, सरकार गिरने को लेकर राहुल गांधी का बयान उनका राजनीतिक दावा है। इसे सरकार के भविष्य के बारे में किसी निश्चित परिणाम के रूप में नहीं देखा जा सकता।

'तीन-चार दिनों की तरह दबाव बनाए रखा तो सरकार गिर जाएगी'

राहुल गांधी ने अपने संबोधन में कहा, ''यदि हम पिछले तीन-चार दिनों की तरह अपना दबाव बनाए रखते हैं, तो मैं गारंटी देता हूं कि यह सरकार गिर जाएगी।'' उनके इस बयान ने इंडिया गठबंधन के आंदोलन को लेकर राजनीतिक चर्चा को और तेज कर दिया। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधते हुए कहा कि वह केवल एक 'सर्विस प्रोवाइडर' यानी सेवा प्रदाता हैं, लेकिन उनमें यह कहने का साहस है कि वह जनता के निर्वाचित प्रतिनिधियों से मुलाकात नहीं करेंगे। राहुल गांधी ने इस टिप्पणी के जरिए चुनाव आयोग की भूमिका और निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के साथ उसके व्यवहार को लेकर अपना विरोध जाहिर किया। राहुल गांधी ने यह भी कहा कि यह ऐसी लड़ाई है, जिसके लिए संघर्ष करना और यहां तक कि जान देना भी सार्थक है। उनके इस बयान से स्पष्ट हुआ कि कांग्रेस नेतृत्व इस मुद्दे को केवल एक प्रशासनिक या चुनावी विवाद के बजाय लोकतंत्र और संवैधानिक व्यवस्था से जुड़ा बड़ा राजनीतिक सवाल बता रहा है।

SIR और कथित वोट चोरी पर विपक्ष की मुख्य मांगें

इंडिया गठबंधन का मौजूदा आंदोलन विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और कथित वोट चोरी के आरोपों को लेकर केंद्रित है। विपक्षी दल इस प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं और चुनावी व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं। इसी सिलसिले में विपक्षी नेताओं ने राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने और SIR प्रक्रिया रद्द करने की मांग की। विपक्ष का कहना है कि लोकतंत्र में मतदाताओं के अधिकारों और चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता को लेकर उठने वाले सवालों पर कार्रवाई होनी चाहिए। राष्ट्रपति को सौंपे गए ज्ञापन और विजय चौक पर हुए प्रदर्शन के जरिए गठबंधन ने अपनी मांगों को राष्ट्रीय राजनीतिक चर्चा के केंद्र में लाने का प्रयास किया। इस पूरे घटनाक्रम में कांग्रेस के साथ तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, वामपंथी दलों, राष्ट्रीय जनता दल, नेशनल कॉन्फ्रेंस और अन्य विपक्षी दलों के प्रमुख नेताओं की भागीदारी भी सामने आई। इससे यह संकेत मिला कि इस मुद्दे पर इंडिया गठबंधन के विभिन्न घटक दल संयुक्त रूप से अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं।

प्रियंका गांधी की अगुवाई में सड़क पर उतरे सांसद

राष्ट्रपति भवन के अंदर प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात के दौरान विजय चौक पर जारी धरना विपक्ष की रणनीति का दूसरा महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। प्रियंका गांधी वाड्रा की अगुवाई में सांसदों ने नारेबाजी करते हुए राष्ट्रपति से लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए कदम उठाने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की मांग भी दोहराई। विपक्षी सांसदों का यह प्रदर्शन ऐसे समय हुआ, जब इंडिया गठबंधन लगातार चौथे दिन SIR के मुद्दे पर आंदोलन कर रहा था। संसद भवन से राष्ट्रपति भवन तक मार्च और विजय चौक पर धरने के जरिए विपक्ष ने यह दिखाने की कोशिश की कि वह अपनी मांगों को लेकर पीछे हटने के लिए तैयार नहीं है।

आगे क्या होगा, निगाहें विपक्ष की रणनीति पर

9 अक्टूबर 2026 को हुए इस घटनाक्रम में राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपना, विजय चौक पर धरना और राहुल गांधी का सरकार गिरने का दावा प्रमुख राजनीतिक घटनाएं रहीं। विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने और SIR रद्द करने की मांग को फिर दोहराया है। साथ ही राहुल गांधी ने आंदोलन के दबाव को सरकार के लिए चुनौती बताते हुए विपक्षी एकजुटता बनाए रखने पर जोर दिया। फिलहाल इस पूरे विवाद का अगला घटनाक्रम विपक्ष की आगे की रणनीति, उसकी मांगों पर होने वाली कार्रवाई और चुनावी प्रक्रिया को लेकर जारी राजनीतिक बहस से जुड़ा रहेगा। इंडिया गठबंधन ने अपने विरोध के माध्यम से चुनावी पारदर्शिता, मतदाताओं के अधिकार और संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका से जुड़े सवाल उठाए हैं। अब इस आंदोलन का आगे क्या परिणाम निकलता है, यह आने वाले घटनाक्रम पर निर्भर करेगा।