भारतीय रेलवे को देश की जीवनरेखा कहा जाता है। हर दिन करोड़ों लोग ट्रेनों से सफर करते हैं और इसे देश का सबसे भरोसेमंद परिवहन नेटवर्क माना जाता है। लेकिन पिछले तीन दिनों में सामने आई तीन घटनाओं ने इस भरोसे पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हैदराबाद से शुरू हुआ आग लगने का सिलसिला मध्य प्रदेश होते हुए अब बिहार के सासाराम तक पहुंच गया है। चिंताजनक बात यह है कि इन हादसों की चपेट में पैसेंजर ट्रेन से लेकर देश की प्रतिष्ठित राजधानी एक्सप्रेस तक आ गई। हालांकि राहत की बात यह रही कि तीनों घटनाओं में किसी यात्री की जान नहीं गई, लेकिन लगातार हो रहे ऐसे हादसों ने यात्रियों के मन में भय और रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
पहला मामला: हैदराबाद स्टेशन पर स्पेशल ट्रेन के कोच में आग
घटनाओं की शुरुआत 15 मई को हैदराबाद के नामपल्ली रेलवे स्टेशन से हुई। यहां प्लेटफॉर्म पर खड़ी हैदराबाद-जयपुर स्पेशल ट्रेन के एक वातानुकूलित कोच में अचानक आग लग गई। देखते ही देखते धुआं फैलने लगा और आग पास के दूसरे कोच तक पहुंच गई। यह घटना ट्रेन के रवाना होने से कुछ समय पहले हुई। रेलवे कर्मचारियों ने समय रहते धुआं देख लिया और तुरंत फायर ब्रिगेड को सूचना दी। आग जिस कोच में लगी थी, वह खाली था। इसके बावजूद स्टेशन पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। प्रभावित डिब्बों को ट्रेन से अलग कर दिया गया और यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।हालांकि हादसा टल गया, लेकिन इस घटना ने पहली बार रेलवे सुरक्षा तंत्र पर सवाल खड़े किए।
दूसरा झटका: राजधानी एक्सप्रेस भी आग की चपेट में
पहले हादसे के दो दिन बाद 17 मई को देश की सबसे महत्वपूर्ण ट्रेनों में गिनी जाने वाली तिरुवनंतपुरम-हजरत निजामुद्दीन राजधानी एक्सप्रेस में आग लग गई। यह घटना मध्य प्रदेश में रतलाम जंक्शन पार करने के बाद हुई। रिपोर्टों के अनुसार ट्रेन के बी-1 कोच में अचानक आग लगी। आग इतनी तेज थी कि उसके पीछे लगे लगेज ब्रेक और जनरेटर कार तक प्रभावित हो गए। राजधानी एक्सप्रेस जैसी हाई-प्रोफाइल ट्रेन में आग लगने की खबर ने रेलवे प्रशासन की चिंता और बढ़ा दी।रेलवे अधिकारियों ने तुरंत उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए। इसके साथ ही कोचों में आग से जुड़ी सुरक्षा व्यवस्था का विशेष ऑडिट शुरू करने का निर्णय भी लिया गया।
तीसरा मामला: बिहार के सासाराम में पैसेंजर ट्रेन में आग
इसके बाद तीसरा मामला बिहार के सासाराम रेलवे स्टेशन से सामने आया। आरा होते हुए पटना जाने वाली पैसेंजर ट्रेन में अचानक आग लग गई। स्टेशन पर मौजूद लोगों ने धुआं उठते देखा तो हड़कंप मच गया। अधिकारियों और कर्मचारियों ने तत्काल कार्रवाई की और स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास शुरू किया। समय रहते यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। एक बार फिर जनहानि टल गई, लेकिन लगातार तीसरी घटना ने सवालों को और गंभीर बना दिया।
क्या रेलवे सुरक्षा तंत्र में कहीं बड़ी चूक है?
तीन दिनों में लगातार तीन ट्रेनों में आग लगना सामान्य घटना नहीं माना जा रहा। खासकर तब, जब इनमें एक पैसेंजर ट्रेन, एक स्पेशल ट्रेन और एक राजधानी एक्सप्रेस शामिल हो। रेलवे अब इन घटनाओं के तकनीकी कारणों की जांच कर रहा है, लेकिन विशेषज्ञों की नजर कुछ बड़े सवालों पर भी है। क्या कोचों की नियमित जांच में कहीं कमी रह गई? क्या इलेक्ट्रिकल सिस्टम और रखरखाव को लेकर गंभीर लापरवाही हुई? या फिर ट्रेनों की बढ़ती संख्या के मुकाबले सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त नहीं है? रेलवे के सामने अब केवल इन हादसों की जांच का सवाल नहीं है, बल्कि यात्रियों का भरोसा बनाए रखने की भी चुनौती है। क्योंकि ट्रेनों में आग की घटनाएं केवल तकनीकी समस्या नहीं, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय बन चुकी हैं।
