बिहार कांग्रेस ने संगठनात्मक अनुशासन को लेकर बड़ा और सख्त फैसला लेते हुए पार्टी के तीन नेताओं को छह वर्षों के लिए निष्कासित कर दिया है। प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व ने पार्टी विरोधी गतिविधियों और अनुशासनहीनता के आरोपों को गंभीर मानते हुए यह कार्रवाई की है। इस फैसले के बाद सबसे अधिक चर्चा एनएसयूआई के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राशिद फाखरी के नाम की हो रही है। पार्टी की ओर से जारी आदेश के अनुसार उन्हें छह साल के लिए कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से बाहर कर दिया गया है। उनके साथ युवा इंटक नेता ओंकार शक्ति और चंदन सिंह पर भी समान कार्रवाई की गई है। बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से साफ कहा गया कि संगठन में अनुशासन सर्वोपरि है और पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिए कोई जगह नहीं है।



आखिर ऐसी कौन सी वजह बनी कि पार्टी ने लिया इतना बड़ा फैसला?

कांग्रेस नेतृत्व के अनुसार यह कार्रवाई अचानक नहीं हुई, बल्कि इसके पीछे एक विवादित घटनाक्रम है। रिपोर्टों के मुताबिक मामला 6 जनवरी 2026 को मधुबनी में आयोजित एक कार्यक्रम से जुड़ा है। आरोप है कि इस कार्यक्रम के दौरान डॉ. राशिद फाखरी और उनके समर्थकों ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता डॉ. शकील अहमद खान के साथ अभद्र व्यवहार किया। पार्टी के भीतर इस घटना को बेहद गंभीरता से लिया गया। सूत्रों के मुताबिक विवाद केवल बहस या नाराजगी तक सीमित नहीं था। आरोप यह भी लगे कि इस घटनाक्रम के बाद कुछ कांग्रेस कार्यकर्ताओं के खिलाफ पुलिस में शिकायत और कानूनी कार्रवाई की कोशिशें हुईं। प्रदेश अनुशासन समिति ने इस पूरे घटनाक्रम को संगठनात्मक मर्यादा के खिलाफ माना। इसके बाद पूरे मामले की समीक्षा की गई और कार्रवाई की सिफारिश की गई।


छात्र राजनीति से कांग्रेस के उभरते चेहरे तक, कौन हैं डॉ. राशिद फाखरी?

डॉ. राशिद फाखरी बिहार की छात्र और युवा राजनीति का एक जाना-पहचाना नाम रहे हैं। राष्ट्रीय छात्र संगठन यानी एनएसयूआई में उनकी सक्रियता लंबे समय तक चर्चा में रही। प्रदेश अध्यक्ष के रूप में उन्होंने छात्र राजनीति में कई आंदोलनों और कार्यक्रमों का नेतृत्व किया। सीमांचल और मिथिलांचल क्षेत्र में उनकी राजनीतिक पकड़ की भी चर्चा होती रही है।कांग्रेस संगठन के भीतर उन्हें युवा और अल्पसंख्यक राजनीति के एक उभरते चेहरे के तौर पर देखा जाता था। छात्र राजनीति से मुख्यधारा की राजनीति तक पहुंचने की उनकी कोशिश लगातार दिखाई देती रही। यही वजह है कि उनके खिलाफ हुई कार्रवाई को एक सामान्य संगठनात्मक कदम से कहीं बड़ा माना जा रहा है।राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राशिद फाखरी जैसे नेता संगठन के भीतर युवा कार्यकर्ताओं के बीच प्रभाव रखते थे। इसलिए उनके निष्कासन का असर सिर्फ एक व्यक्ति तक सीमित नहीं, बल्कि संगठन के अंदरूनी समीकरणों पर भी पड़ सकता है।


सिर्फ राशिद फाखरी नहीं, इन दो नेताओं पर भी हुई कार्रवाई

इस पूरे मामले में कांग्रेस ने केवल एक चेहरे पर कार्रवाई नहीं की। युवा इंटक नेता ओंकार शक्ति और चंदन सिंह को भी छह वर्षों के लिए पार्टी से निष्कासित किया गया है। पार्टी के अनुसार इन दोनों नेताओं पर प्रदेश नेतृत्व के खिलाफ कथित अशोभनीय टिप्पणियां करने और संगठनात्मक अनुशासन का उल्लंघन करने के आरोप लगे हैं।हालांकि सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी में इनके खिलाफ लगे आरोपों का विस्तृत विवरण सामने नहीं आया है, लेकिन प्रदेश कांग्रेस ने इन्हें भी पार्टी विरोधी गतिविधियों की श्रेणी में रखा है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि सार्वजनिक मंचों पर संगठन और नेतृत्व के खिलाफ टिप्पणी करना अनुशासनहीनता के दायरे में आता है।



कांग्रेस का बड़ा संदेश: व्यक्ति से ऊपर संगठन

बिहार प्रदेश कांग्रेस अनुशासन समिति के अध्यक्ष कपिल देव प्रसाद यादव द्वारा जारी आदेश को केवल प्रशासनिक कार्रवाई नहीं माना जा रहा। इसे संगठन के भीतर एक स्पष्ट संदेश के तौर पर देखा जा रहा है कि पार्टी में व्यक्ति से बड़ा संगठन है। कांग्रेस नेतृत्व ने संकेत दिया है कि आने वाले समय में भी अनुशासन के मामलों में इसी तरह की सख्ती जारी रहेगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार में बदलते राजनीतिक माहौल और भविष्य की चुनावी तैयारियों को देखते हुए कांग्रेस अपने संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने में जुटी हुई है। ऐसे समय में पार्टी के भीतर किसी भी तरह की गुटबाजी या सार्वजनिक विवाद को नियंत्रण में रखने की कोशिशें तेज दिखाई दे रही हैं। राशिद फाखरी और अन्य नेताओं पर हुई कार्रवाई ने बिहार कांग्रेस के अंदर एक नई चर्चा शुरू कर दी है। अब देखने वाली बात यह होगी कि यह मामला केवल संगठनात्मक अनुशासन तक सीमित रहता है या आने वाले समय में राज्य की राजनीति में इसके और बड़े असर देखने को मिलते हैं।